सिनेमा विचारों,संस्कृतियों और रचनात्मक अभिव्यक्ति के आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम:राज्यपाल।

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल ने 12वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव शिमला(आईएफएफएस)के प्रतिष्ठित पुरस्कार समारोह में विजेता फिल्मकारों को पुरस्कार प्रदान किए। ऐतिहासिक गेयटी सांस्कृतिक परिसर,शिमला में आयोजित यह समारोह तीन दिवसीय फिल्म महोत्सव के भव्य समापन का प्रतीक बना।राज्यपाल ने अंतरराष्ट्रीय,राष्ट्रीय और राज्य श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली फिल्मों के फिल्मकारों को सम्मानित किया।पुरस्कारों में वृत्तचित्र,लघु फिल्म, एनीमेशन,छात्र फिल्म तथा एआई आधारित सिनेमा सहित फिल्म निर्माण के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्टता को सम्मान दिया गया।समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने सभी पुरस्कार विजेता फिल्मकारों और प्रतिभागियों को बधाई दी तथा अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव शिमला द्वारा विभिन्न देशों,भारतीय राज्यों और विविध सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों से आने वाले फिल्मकारों को एक मंच प्रदान करने की सराहना की।

उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विभिन्न संस्कृतियों और समाजों के बीच संवाद एवं समझ को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।श्री कविंद्र गुप्ता ने कहा कि सिनेमा समाज को प्रतिबिंबित करने के साथ-साथ उसके साथ संवाद भी करता है और विभिन्न जीवन,संस्कृतियों तथा संवेदनाओं को समझने का अवसर प्रदान करता है।उन्होंने कहा कि भारत के विभिन्न क्षेत्रों एवं भाषाओं के साथ-साथ विभिन्न देशों की फिल्मों की सहभागिता ने महोत्सव को वास्तविक अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया है।भारतीय भाषाई एवं क्षेत्रीय सिनेमा की विविधता को प्रमुखता दिया जाना देश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाता है।उन्होंने कहा कि हिमाचल की समृद्ध लोक संस्कृति,लोक कथाएं,संगीत,नृत्य,हस्तशिल्प और प्राकृतिक सौंदर्य फिल्मकारों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं और शिमला में ऐसे महोत्सव का आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को देश और दुनिया तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।राज्यपाल ने महोत्सव में फिल्मकारों और दर्शकों के बीच संवाद,मास्टर क्लास तथा ज्ञान के आदान-प्रदान को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया।उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक और नए मीडिया प्लेटफॉर्म ने युवा फिल्मकारों के लिए अपनी कहानियों को व्यापक स्तर तक पहुंचाने के नए अवसर उपलब्ध करवाए हैं,लेकिन तकनीक के साथ कहानी की मौलिकता,सामाजिक संवेदनशीलता और रचनात्मक ईमानदारी भी आवश्यक है।उन्होंने पुरस्कार प्राप्त करने वाले कलाकारों एवं फिल्मकारों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे अपनी रचनात्मक जिज्ञासा को निरंतर बनाए रखें।उन्होंने आयोजन टीम,सहयोगी संस्थाओं,फिल्म चयन समिति और महोत्सव से जुड़े सभी सदस्यों को भी बधाई दी तथा आशा व्यक्त की कि अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव शिमला भविष्य में भी भारत और विश्व के फिल्मकारों को जोड़ने,हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक मंच प्रदान करने और युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।पुरस्कार समारोह में फिल्मकारों,प्रतिनिधियों,फिल्म प्रेमियों,विद्यार्थियों और सिनेमा से जुडें लोगों ने भाग लिया और इस प्रकार आईएफएफएस के 12वें संस्करण का शानदार समापन हुआ।
अंतरराष्ट्रीय,राष्ट्रीय और राज्य श्रेणियों में पुरस्कार
अंतरराष्ट्रीय श्रेणी:सर्वश्रेष्ठ लंबी वृत्तचित्र फिल्म:फार फ्रॉम हो
सर्वश्रेष्ठ लघु वृत्तचित्र फिल्म:द साउंड ऑफ द सोल।
विशेष जूरी पुरस्कार – लघु वृत्तचित्र:द एवरेस्ट ड्रीम।
सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म:रिन्यूअल।
विशेष जूरी पुरस्कार – लघु फिल्म:द मोल्ड।
सर्वश्रेष्ठ एनीमेशन फिल्म:द रस्टि फिश।
विशेष जूरी पुरस्कार – एनीमेशन फिल्म:मिलो।
सर्वश्रेष्ठ एआई फिल्म:को-एग्जिस्टेंस।
सर्वश्रेष्ठ छात्र फिल्म:इटरनल किनशिप।
विशेष जूरी पुरस्कार – छात्र फिल्म:ललाबी
राष्ट्रीय श्रेणी:सर्वश्रेष्ठ लंबी वृत्तचित्र फिल्म:द जेनेसिस ऑफ रसा।
सर्वश्रेष्ठ लघु वृत्तचित्र फिल्म:कोल डिगर्स ऑफ इंडिया
सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म:हलगी।
विशेष जूरी पुरस्कार – लघु फिल्म: न्यिंगमा.थ्रू हर आइज़
विशेष जूरी पुरस्कार – लघु फिल्म:एन ऑयस्टर लाइफ
हिमाचल श्रेणी:सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म:तेनफा।
विशेष जूरी पुरस्कार – लघु फिल्म:चुपी रोह
अंतिम दिन विविध सिनेमाई आवाजों का प्रदर्शन:आईएफएफएस के तीसरे और अंतिम दिन अंतरराष्ट्रीय,राष्ट्रीय और क्षेत्रीय फिल्मों की विविधतापूर्ण श्रृंखला को तीन स्क्रीनिंग सत्रों में प्रदर्शित किया गया।सुबह के सत्र में लंबी वृत्तचित्र फिल्मों फार फ्रॉम होम और द जेनेसिस ऑफ रसा का प्रदर्शन किया गया।दोपहर के सत्र में लघु एवं एनीमेशन फिल्मों मं रिन्यूअल,द मोल्ड,द रस्टि फिश,मिलो,हलगी और तेनफा शामिल रहीं।शाम के सत्र में एआई,छात्र,वृत्तचित्र और क्षेत्रीय सिनेमा की विविध प्रस्तुतियां देखने को मिलीं।इनमें को-एग्जिस्टेंस,इटरनल किनशिप,ललाबी,द साउंड ऑफ द सोल,द एवरेस्ट ड्रीम, कोल डिगर्स ऑफ इंडिया,न्यिंगमा..थ्रू हर आइज़,एन ऑयस्टर लाइफ और चुपी रोह शामिल थीं।इन फिल्मों में संस्कृति,मानवीय संबंधों,सामाजिक यथार्थ,पर्यावरण और समकालीन कहानी कहने के नए तरीकों सहित विभिन्न विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
