
विधानसभा में मंगलवार को बंद किए गए संस्थानों को लेकर जबरदस्त हंगामा हुआ।प्रश्नकाल में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर का यह पहला सवाल लगा,जवाब में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बताया कि गत तीन वर्षों में 31 जुलाई,2025 तक विभिन्न विभागों के 2035 संस्थान या तो बंद किए गए या डी-नोटिफाई किए गए।इसी अवधि में राज्य सरकार ने 262 नए संस्थान भी खोले।बंद किए गए संस्थानों में से 123 को दोबारा बहाल किया गया।सीएम ने कहा कि सरकार जनता की जरूरत के अनुसार संस्थान खोलती है। पूर्व सरकार के समय चुनाव से ठीक पहले हजारों संस्थान खोल दिए गए,जिसका मकसद राजनीतिक लाभ लेना था। भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने अनुपूरक सवाल किया कि सरकार नीड बेस्ड किस आधार पर तय करती है।उनके चुनाव क्षेत्र में जल शक्ति विभाग का एक डिविीजन खुला था और पूरे स्टाफ के साथ चल रहा था,लेकिन छह महीने बाद इसे बंद कर दिया गया।अब जहां दोबारा खुला है,वह भी किराए के भवन में चल रहा है और स्टाफ भी कम है।

जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्थान बंद करना या खोलना निरंतर असेस्मेंट की प्रक्रिया है।यदि भाजपा सरकार ने खोलने थे तो पहले तीन साल में क्यों नहीं खोले?भाजपा विधायक बिक्रम ठाकुर ने मुख्यमंत्री से पूछा कि 15 अप्रैल,2026 को उन्होंने परागपुर में एसडीएम कार्यालय खोलने की बात की थी।सितंबर हो गया,लेकिन एसडीएम नहीं आया।सीएम ने जवाब दिया कि कैबिनेट से अप्रूवल हो गई है,लेकिन यह मामला हाई कोर्ट गया।इस बारे में जल्दी अधिसूचना जारी कर देंगे।चुराह से विधायक डा.हंसराज ने अपने चुनाव क्षेत्र में स्वास्थ्य और बिजली बोर्ड के संस्थानों को बंद करने का मामला उठाया।मुख्यमंत्री ने जवाब दिया कि वह खुद चुराह के दौरे पर आ रहे हैं और उसके बाद स्थिति का आकलन करेंगे।

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि पूरे पांच साल के फैसले रिव्यू करेंगे:नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने फिर आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने कैबिनेट बनने से पहले ही शपथ के बाद संस्थान बंद करने का फैसला ले लिया था,तो इन्हें जनता की जरूरत एकदम कैसे पता चली?जयराम ठाकुर ने सदन में यह भी कह दिया कि भाजपा जब सत्ता में आएगी तो वर्तमान सरकार के पांच साल के फैसले रिव्यू होंगे।
