शिमला।भाजपा विधायक बिक्रम सिंह ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा में नियम 62 के अंतर्गत ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से सिरमौर के बागनाधार और कमरऊ क्षेत्र में हुए दर्दनाक खनन हादसे का मामला उठाया।उन्होंने कहा कि 18 अगस्त 2026 को भारी बारिश के दौरान खनन कार्य के बीच भूस्खलन होने से तीन मजदूरों की दबकर मौत हो गई।यह अत्यंत गंभीर विषय है कि जब बरसात के दौरान खनन गतिविधियों पर प्रतिबंध रहता है,तो उस समय वहां खनन कार्य कैसे चल रहा था।बिक्रम सिंह ठाकुर ने सरकार से पूछा कि यदि बरसात में खनन पर रोक थी,तो संबंधित खदान में काम किसकी अनुमति से चल रहा था और संबंधित विभागों ने इसकी निगरानी क्यों नहीं की।यदि खनन की अनुमति थी,तो भारी बारिश और भूस्खलन के खतरे के बीच मजदूरों की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था की गई थी।उन्होंने कहा कि जिस खदान में अत्यधिक और खड़ी कटिंग के कारण पहले से खतरा बना हुआ था,उसे बंद करने की बात भी सामने आई थी।इसके बावजूद खदान को बंद क्यों नहीं किया गया और वहां खनन कार्य कैसे जारी रहा,सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।भाजपा विधायक ने हादसे की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए पूछा कि अब तक इस मामले में क्या कार्रवाई हुई है,जांच कौन कर रहा है,खदान के सुरक्षा मानकों की जांच हुई है या नहीं और यदि किसी अधिकारी,ठेकेदार या खनन संचालक की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने कहा कि यह केवल एक खनन हादसा नहीं,बल्कि तीन परिवारों से उनके अपनों को छीन लेने वाली गंभीर घटना है। सरकार की जिम्मेदारी है कि पूरे मामले की तह तक जाकर दोषियों की जवाबदेही तय करे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए।बिक्रम सिंह ठाकुर ने कहा कि खनन नियम केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए।यदि नियमों के उल्लंघन या लापरवाही के कारण मजदूरों की जान जाती है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।उन्होंने स्पष्ट कहा कि खनन विकास का हिस्सा हो सकता है,लेकिन मजदूरों की सुरक्षा और नियमों की कीमत पर नहीं।सरकार को बरसात के दौरान खनन,खदान की खतरनाक कटिंग और तीन मजदूरों की मौत के मामले में सदन के सामने स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

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