विधायक कुलदीप सिंह राठौर द्वारा सदन में उठाए गए सेब उत्पादकों के मुद्दों को बताया ऐतिहासिक,कहा अमेरिका के साथ ट्रेड डील में हिमाचल के हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं।

शिमला।हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव हरि कृष्ण हिमराल ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा द्वारा बागवानों के हित में प्रस्ताव पारित किए जाने का स्वागत करते हुए इसे प्रदेश के सेब उत्पादकों,बागवानों और फल उत्पादक किसानों के लिए ऐतिहासिक कदम बताया है।उन्होंने कहा कि पहली बार हिमाचल विधानसभा ने भारत सरकार और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील के बीच प्रदेश के बागवानों की चिंताओं को गंभीरता से सदन में उठाया और उनके पक्ष में एकजुट होकर आवाज़ बुलंद की।हरि कृष्ण हिमराल ने कहा कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे को विधानसभा में प्रभावी ढंग से उठाने का श्रेय कांग्रेस विधायक कुलदीप सिंह राठौर को जाता है,जिन्होंने सदन में विस्तार से यह बताया कि यदि अमेरिका के साथ प्रस्तावित बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट के तहत सेब आयात को और अधिक खुली छूट दी गई,तो इसका सीधा और गंभीर असर हिमाचल प्रदेश के करीब डेढ़ लाख से अधिक सेब उत्पादक परिवारों पर पड़ेगा।उन्होंने कहा कि कुलदीप सिंह राठौर ने सदन में जो तथ्य रखे,वे बेहद चिंताजनक हैं।उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमाचल का सेब उत्पादक किसान औसतन एक से दो एकड़ भूमि पर निर्भर है,जबकि अमेरिका के वाशिंगटन जैसे राज्यों में सेब के बागों का औसत आकार करीब 100 एकड़ तक है।ऐसे में यह प्रतिस्पर्धा नहीं,बल्कि एक संरचनात्मक असमानता है,जिसमें हिमाचल का छोटा किसान सीधे तौर पर नुकसान में रहेगा।

हरि कृष्ण हिमराल ने कहा कि सदन में यह भी मजबूती से उठाया गया कि अमेरिकी सेब उत्पादकों को वहां की सरकार से भारी आर्थिक सहायता,बीमा,आपदा राहत,पुनःरोपण सहायता,निर्यात प्रोत्साहन और बाजार समर्थन मिलता है,जबकि भारत के छोटे बागवान आज भी बढ़ती लागत,जलवायु परिवर्तन,ओलावृष्टि,उत्पादन संकट और बाजार दबाव से जूझ रहे हैं।ऐसे में अगर आयात नीति को बिना पर्याप्त सुरक्षा के ढीला किया गया,तो हिमाचल के बागवानों के लिए यह गंभीर संकट खड़ा कर सकता है।उन्होंने कहा कि सदन में मिनिमम इंपोर्ट प्राइस के प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत पर भी जोर दिया गया।हिमराल ने कहा कि सिर्फ कागजों में MIP बढ़ाने से किसानों को राहत नहीं मिलेगी,बल्कि अंडर-इनवॉइसिंग,कम कीमत पर आयात और मंडियों में विदेशी सेब की अनियंत्रित एंट्री पर सख्ती से रोक लगानी होगी।उन्होंने कहा कि फिक्स्ड प्रति किलोग्राम ड्यूटी स्ट्रक्चर जैसे विकल्पों पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए,ताकि आयातित सेबों के जरिए घरेलू बाजार को असंतुलित न किया जा सके।हरि कृष्ण हिमराल ने कहा कि हिमाचल के बागवानों के लिए सबसे बड़ा खतरा तब पैदा होता है,जब विदेशी सेब उसी समय बाजार में उतरते हैं,जब प्रदेश के किसान अपनी पीक सीजन फसल मंडियों में भेज रहे होते हैं।इससे बाजार में अधिक आपूर्ति की स्थिति बनती है और सेब के दामों पर सीधा दबाव आता है।इसका असर पहले प्रीमियम ग्रेड पर पड़ता है और फिर धीरे-धीरे सभी ग्रेड की कीमतें नीचे चली जाती हैं,जिससे किसानों की आय बुरी तरह प्रभावित होती है।उन्होंने कहा कि सदन में यह भी उचित रूप से रेखांकित किया गया कि सरकार ने वर्षों से कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर टोरेज,कोल्ड चेन और बागवानी ढांचे पर निवेश किया है,ताकि किसान मजबूरी में औने-पौने दाम पर अपनी उपज बेचने को मजबूर न हों।लेकिन यदि आयातित फल सस्ते दामों पर बाजार में आएंगे,तो इसका सीधा असर न केवल किसानों की कमाई पर पड़ेगा,बल्कि CA स्टोरेज,कोल्ड चेन निवेश और पूरी बागवानी अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

हरि कृष्ण हिमराल ने कहा कि यह मामला केवल पारंपरिक सेब बेल्ट तक सीमित नहीं है।अब कम चिलिंग किस्मों के कारण हिमाचल के निचले क्षेत्रों में भी सेब की खेती बढ़ रही है।उन्होंने कहा कि कांगड़ा,सोलन,हमीरपुर,बिलासपुर और ऊना जैसे जिलों में भी अब सेब उत्पादन हो रहा है,जिससे यह मुद्दा और अधिक व्यापक हो गया है।उन्होंने आगे कहा कि HPSHIVA परियोजना के तहत बिलासपुर,हमीरपुर, कांगड़ा,मंडी,सोलन,सिरमौर और ऊना जैसे जिलों में किसान आम,लीची,अमरूद,सिट्रस,अनार,एवोकाडो और ड्रैगन फ्रूट जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर बढ़ रहे हैं।ऐसे में यदि बिना सुरक्षा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों के जरिए सस्ते आयात के रास्ते खोले गए,तो इसका असर केवल सेब तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि हिमाचल की उभरती हॉर्टिकल्चर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।हरि कृष्ण हिमराल ने कहा कि हिमाचल विधानसभा द्वारा इस मुद्दे पर एकजुट होकर प्रस्ताव पारित करना इस बात का स्पष्ट संदेश है कि प्रदेश अपने किसानों,बागवानों और फल उत्पादकों के हितों से कोई समझौता नहीं करेगा।उन्होंने कहा कि इसके लिए कांग्रेस सरकार,विधानसभा के सभी सदस्यों और विशेष रूप से कुलदीप सिंह राठौर का धन्यवाद किया जाना चाहिए,जिन्होंने इस मुद्दे को केवल राजनीतिक विषय न बनाकर प्रदेश की आजीविका,अर्थव्यवस्था और किसान अस्मिता से जोड़ा।उन्होंने कहा कि यह फैसला हिमाचल के किसानों के पक्ष में एक मजबूत राजनीतिक और नैतिक संदेश है कि जब भी प्रदेश के हितों पर कोई खतरा आएगा,कांग्रेस पार्टी हिमाचल की आवाज़ सदन के भीतर और बाहर मजबूती से उठाएंगे,अंत में हरि कृष्ण हिमराल ने कहा कि यह समय राजनीति से ऊपर उठकर हिमाचल के किसानों और बागवानों के साथ खड़े होने का है।उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार भी इस प्रस्ताव की भावना को समझते हुए किसी भी ऐसे व्यापारिक समझौते से पहले हिमाचल के बागवानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी।
