
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू अपने कार्यकाल का तीसरा बजट आज पेश करने जा रहे हैं।रविवार को अधिकारियों के साथ पूरा दिन बैठक करके मुख्यमंत्री ने अपने बजट को फाइनल किया।राज्य में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है,जिसके लिए जरूरी है कि वहां कृषि क्षेत्र को बढ़ाया जाए,किसानों की आय बढ़े और दुग्ध उत्पादकों को राहत प्रदान की जाए।क्योंकि प्राकृतिक खेती को लेकर केंद्र सरकार का भी मिशन यहां चलेगा लिहाजा उस मिशन से गांवों को काफी राहत मिलेगी।उसका भी लाभ राज्य सरकार यहां पर लेगी।हिमाचल प्रदेश पर इस समय करीब एक लाख करोड़ के आसपास कर्ज चढ़ चुका है,जिस कारण राज्य की आर्थिकी हिचकोले खा रही है।ऐसे में प्रतिकूल हालात के बीच मुख्यमंत्री पर कर्मचारी-पेंशनरों को डीए व बकाया एरियर देने के साथ आम आदमी को राहत पहुंचाने के लिए दबाव रहेगा।बजट में सरकार के ऊपर चुनावी गारंटियों को पूरा करने का दबाव भी रहेगा।वित्तीय वर्ष,2024-25 का बजट आकार 58,444 करोड़ रुपए था तथा आगामी वित्तीय वर्ष,2025-26 का बजट आकार भी इसके आसपास ही रहने की संभावना है।सरकार को विकास कार्य के लिए धनराशि जुटाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी होगी।मौजूदा वित्तीय हालात की बात करें तो 31 मार्च,2025 को समाप्त होने जा रहे वित्तीय वर्ष के बजट में विकास कार्य के लिए 100 रुपए में से 28 रुपए रखे गए थे।इसके अलावा वेतन पर 25 रुपए,पेंशन पर 17 रुपए,ऋण अदायगी पर नौ रुपए व ब्याज अदायगी पर 11 रुपए का प्रावधान किया गया था। ऐसे में आगामी बजट में किस मद के लिए कितनी राशि मिल पाती है यह देखना महत्त्वपूर्ण रहेगा।हिमाचल प्रदेश की आर्थिक तंगी का एक कारण सरकारी कर्मचारियों के वेतन एवं पेंशन पर बढऩे वाला खर्च है।इसमें वेतन पर 13,600 करोड़ रुपए एवं पेंशन पर 10,800 करोड़ रुपए,उपदानों पर 6,358 करोड़ और सहायता अनुदान पर 3,400 करोड़ खर्च होने की बात कही गई है।इन सभी के बावजूद बेहतरीन बजट रहेगा।सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रविवार को पूरा दिन बजट बैठक करने के बाद उसे फाइनल रूप दिया और इसके बाद अपने साथियों के साथ माल रोड की सैर को निकल पड़े।मुख्यमंत्री मालरोड से होते हुए कालीबाड़ी मंदिर गए जहां उन्होंने माथा टेका और मां काली का आशीर्वाद लिया।
