लोग अपने अहंकार को अलग रखें तो देश में अदालतों की जरूरत नहीं रहेगी।आपस में बातचीत से कई मामले हल हो जाते हैं।यह बात धर्मशाला में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के सौजन्य से आयोजित राष्ट्रीय विधिक सेवा महा शिविर में हिमाचल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अहमद ए सैयद ने कही। वह कार्यक्रम के मुख्यातिथि थे।उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति सबीना,न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक ठाकुर,राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव अशोक जैन,राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव प्रेम पाल रांटा विशेष अतिथि थे।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अमजद ए सैयद ने कहा कि समाज के सभी वर्गों में शांति और भाईचारा स्थापित करना कानून का अंतिम लक्ष्य है और न्याय प्राप्त करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है। ऐसे शिविरों का मूल उद्देश्य लोगों में न्याय के बारे में जागरूकता पैदा करना है।बताया कि नालसा की ओर से अगस्त में देश में आयोजित की गई लोक अदालतों के माध्यम से आपसी सहमति से एक करोड़ मामलों का निपटारा किया गया था। बताया कि निशुल्क सेवा के लिए दो-दो साल के लिए अधिवक्ता नियुक्त होंगे।

शिविर में हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील कुकरेजा,न्यायमूर्ति विरेंद्र सिंह,न्यायमूर्ति सत्येन वैद्य, सॉलिसिटर जनरल बलराम शर्मा,रजिस्ट्रार जनरल अरविंद मल्होत्रा,एडवोकेट जनरल अशोक शर्मा, जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय मेहता,उच्च न्यायालय बार काउंसिल के अध्यक्ष अजय कोचड़, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष लवनीश शर्मा,जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव विजय लक्ष्मी,उपायुक्त डॉ. निपुण जिंदल मौजूद रहे।

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