
बाल रंगमंच महोत्सव 2026 का दूसरा दिन भी बच्चों की मेहनत,कल्पनाशीलता और रंगमंच के प्रति उनके उत्साह से सराबोर रहा।गॉथिक हॉल,गेयटी थिएटर में चल रहे महोत्सव के दूसरे दिन छह टीमों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से अलग-अलग कहानियों और भावनाओं को मंच पर जीवंत किया।दो दिनों में 12 प्रस्तुतियां पूरी होने के साथ अब 16 प्रतिस्पर्धी टीमों के बीच शीर्ष पुरस्कारों की दौड़ और भी रोमांचक हो गई है।

महोत्सव की अतिथि,अभिनेत्री एवं रंगकर्मी दिव्या जगदाले ने बच्चों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए उनके प्रयासों को विशेष रूप से सराहा।उन्होंने कहा,“बच्चों ने जिस तरह की प्रतिभा और ऊर्जा का प्रदर्शन किया है,वह बेहद सराहनीय है।इन प्रस्तुतियों में उनकी पूरी मेहनत और लगातार की गई प्रैक्टिस दिखाई देती है।इतनी कम उम्र में मंच पर आकर इतने आत्मविश्वास और समर्पण के साथ प्रदर्शन करना वास्तव में प्रभावशाली है।बच्चों ने जिस तरह अपनी कहानियों को मंच पर जीवंत किया,वह प्रशंसनीय है।उन्होंने बच्चों के साथ काम कर रहे शिक्षकों,निर्देशकों और मार्गदर्शकों के प्रयासों की भी सराहना की और कहा कि इतनी कम उम्र में बच्चों को मंच का अनुभव देना उनके व्यक्तित्व और आत्मविश्वास के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

दूसरे दिन की शुरुआत ई सी आई शैले डे स्कूल की प्रस्तुति ‘बूढ़ों का गांव’ से हुई,जिसे संदीप शर्मा ने लिखा है।इसके बाद सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल,ढली की टीम ने डॉ.कंवर दिनेश सिंह द्वारा लिखित ‘मुआवजा’ प्रस्तुत किया। तीसरी प्रस्तुति जी.एस.एस.एस.कदौर,शोघी की रही,जिसने जयवंती डिमरी की रचना ‘मिनी जंगल प्लॉट’ को मंच पर प्रस्तुत किया।भोजनावकाश के बाद मंच पर दिल्ली पब्लिक स्कूल,शिमला की टीम ने गंगा राम राजी द्वारा लिखित ‘विश्वास’प्रस्तुत किया।इसके बाद पी एम श्री राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला,टूटू ने अंकुश भारती की कहानी ‘यादों का बटन’को मंचित किया।दिन की अंतिम प्रस्तुति शहीद नरेश कुमार राजकीय माध्यमिक पाठशाला,ठैला की रही,जिसने रितेश भारद्वाज द्वारा लिखित ‘आकांक्षा’ को दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया।छहों प्रस्तुतियों में बच्चों ने अभिनय,संवाद अदायगी,भाव-भंगिमाओं और सामूहिक मंचीय अभिव्यक्ति के जरिए अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

हर टीम अपने साथ महीनों की तैयारी,रिहर्सल और मेहनत लेकर मंच पर पहुंची थी।बच्चों के प्रदर्शन में उनकी कहानियों की समझ के साथ-साथ उन्हें मंच पर प्रस्तुत करने का आत्मविश्वास भी स्पष्ट दिखाई दिया।दूसरे दिन की प्रस्तुतियों ने निर्णायक मंडली के सामने चुनौती को और बढ़ा दिया है।डॉ.पूर्णिमा चौहान,अनुराधा दर और आस्था शुक्ला चड्ढा के लिए इन बेहतरीन प्रस्तुतियों में से विजेता चुनना आसान नहीं होगा,क्योंकि प्रत्येक टीम ने अपनी प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाने के लिए पूरी मेहनत की है।

अभिनय,मंचीय अनुशासन,कहानी की प्रस्तुति और बच्चों की सामूहिक मेहनत जैसे विभिन्न पहलुओं को देखते हुए अंतिम निर्णय तक पहुंचना निर्णायकों के लिए निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण रहेगा।महोत्सव में अब तक 12 प्रतिस्पर्धी प्रस्तुतियां मंचित हो चुकी हैं,जबकि कुल 16 टीमें शीर्ष पुरस्कारों के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं।अंतिम चार प्रस्तुतियां 9 अक्टूबर को मंचित की जाएंगी।इसके बाद निर्णायक मंडली सभी प्रस्तुतियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करते हुए अंतिम परिणाम तैयार करेगी,9 अक्टूबर को महोत्सव के समापन अवसर पर विजेताओं की घोषणा की जाएगी।ऐसे में अंतिम दिन की प्रस्तुतियों के साथ-साथ अब सभी की नजरें इस बात पर भी टिकी हैं कि कौन-सी टीमें निर्णायकों का दिल जीतने में सफल होती हैं और शीर्ष पुरस्कार अपने नाम करती हैं।

हालांकि पुरस्कारों की प्रतिस्पर्धा अपने अंतिम पड़ाव पर है,लेकिन इस महोत्सव की असली उपलब्धि उन बच्चों के चेहरे पर दिखाई देती है जिन्होंने मंच पर आकर अपनी कल्पना और मेहनत को दर्शकों के सामने रखा।किसी के लिए यह पहला बड़ा मंच है,तो किसी के लिए अपने आत्मविश्वास को परखने का अवसर।हर प्रस्तुति के पीछे बच्चों की मेहनत,अभ्यास और टीम भावना की एक कहानी है,और यही बाल रंगमंच महोत्सव की सबसे बड़ी खूबसूरती है।
