अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ,हिमाचल प्रदेश इकाई के पूर्व प्रांत महामंत्री,डॉ.मामराज पुंडीर ने कहा कि आज हिमाचल प्रदेश का हर एक कर्मचारी एक गहरे आर्थिक संकट और अन्याय के दौर से गुजर रहा है।एक तरफ केंद्र के कर्मचारी 60 प्रतिशत डीए प्राप्त कर रहे हैं,वहीं दूसरी ओर हिमाचल के कर्मचारियों को मात्र 45 प्रतिशत पर ही संतोष करना पड़ रहा है।यह सीधा-सीधा 15 प्रतिशत का अंतर है,जिसका अर्थ है कि प्रदेश के हर कर्मचारी की जेब से हर महीने 12,000 रुपये से ज्यादा का नुकसान हो रहा है।इतना ही नहीं,वेतन आयोग के एरियर की भारी-भरकम राशि,जो औसतन 15 लाख रुपये से अधिक बनती है,आज भी सरकार की तिजोरियों में बंद है।यह हमारा अधिकार है,कोई खैरात नहीं,लेकिन सबसे बड़ा और चुभता हुआ सवाल उन लोगों के लिए है जो खुद को ‘बड़ा अर्थशास्त्री’ बताते नहीं थकते।आज वो चाटुकार कर्मचारी नेता कहाँ छिपे हैं?जब कर्मचारियों के हक पर डाका डाला जा रहा है,जब उनके आर्थिक भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है,तब इन नेताओं की विद्वत्ता और इनका अर्थशास्त्र कहाँ लुप्त हो गया है?सत्ता की चाटुकारिता में डूबे ये नेता आज कर्मचारियों की आवाज़ बनने के बजाय मौन साधे बैठे हैं।याद रखिए,यह चुप्पी आने वाले समय में आपको महंगी पड़ेगी।कर्मचारियों का पसीना और उनका हक मारने वालों को जवाब देना ही होगा।

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