शिमला में हिमाचल किसान सभा का सातवां दो दिवसीय जिला सम्मेलन हुआ सम्पन्न।

हिमाचल किसान सभा का सातवां दो दिवसीय जिला सम्मेलन 27 व 28 फ़रवरी को सफलतापूर्वक आयोजित हुआ।सम्मेलन में विभिन्न ब्लॉकों से लगभग 160 किसान प्रतिनिधियों ने भाग लेकर संगठन की मजबूती और किसान हितों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।सम्मेलन में रंजीत ठाकुर को अध्यक्ष,प्रेम चौहान को सचिव व रमन थारटा को वित्त सचिव चुना गया।इसके साथ ही 45 सदस्यीय जिला कमेटी और 17 सदस्यीय कार्यकारिणी का सर्वसम्मति से गठन किया गया।सम्मेलन का शुभारंभ पूर्व विधायक राकेश सिंघा के उद्घाटन भाषण से हुआ।अपने संबोधन में उन्होंने वर्तमान दौर में किसानों के सामने खड़ी चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए संगठनात्मक एकजुटता को आवश्यक बताया।

इस जिला सम्मेलन में कुल 12 ब्लॉक समितियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया,जिनमें से 10 ब्लॉक शिमला जिला से तथा 2 अन्य जिलों से थे उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व जिला सम्मेलन 22 जुलाई,2022 को ठियोग में आयोजित हुआ था।लगभग साढ़े तीन वर्ष के अंतराल के बाद आयोजित इस सम्मेलन में संगठन के पिछले कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई तथा कृषि विरोधी नीतियों के किसानों पर पड़ रहे प्रभावों पर गंभीर चर्चा हुई।

दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान संगठन को और अधिक सशक्त व विस्तारित करने के लिए अग्रणी कार्यकर्ताओं के अनुभवों और सुझावों के आधार पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।इसमें मुख्य मुद्दे जिन पर चर्चा की गई घरों व ज़मीन से बेदखली पर रोक तथा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार नीति बनाने,भारत सरकार द्वारा न्यूज़ीलैंड,यूरोपियन यूनियन के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौते(FTA) व अमेरिका के साथ ट्रेड डील से सेब व अन्य कृषि उत्पादों की खेती पर संकट,दूध उत्पादकों की समस्याओं,सब्ज़ी,गुठलीदार फल,पशुपालन,जल विद्युत परियोजनाओं से कृषि क्षेत्र को हो रहे नुकसान,मनरेगा को समाप्त करने,बिजली संशोधन बिल,2025 तथा स्मार्ट मीटर का विरोध,बीज विधेयक जैसे मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।सरकार की नीतियों के कारण इन किसान विरोधी मुद्दों पर भविष्य में किसानों को संगठित कर आने वाले समय में आंदोलन विकसित कर अपनी मांगो को हासिल किया जाएगा।

इन मुद्दों को लेकर 24 मार्च,2026 को दिल्ली में होने जा रही रेली में सैकड़ों किसान सभा के साथी भाग लेंगे।समापन सत्र में डॉ.ओंकार सिंह शाद ने संगठनात्मक ढांचे के सशक्तिकरण और विस्तार के बारीक पहलुओं पर विस्तार से विचार रखते हुए कहा कि सिद्धांत और व्यवहार के अंतर को कम कर ही जनसाधारण की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जा सकती है,जिससे संगठन को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।
