टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत मेडिकल स्टोर संचालकों को निर्देश जारी।

प्रदेश में अब खांसी की बीमारी से संबंधित कोई भी कफ सिरप बेचने पर मरीज की पूरी डिटेल मेडिकल स्टोर संचालकों को देना अनिवार्य होगी।मेडिकल स्टोर संचालकों को यह जानकारी टीबी मुक्त हिमाचल ऐप में दर्ज करनी होगी।सरकार की ओर से टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत प्रदेश में भी नई प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।इसके लिए मेडिकल स्टोर संचालकों को प्रशिक्षण भी दिया गया है।यदि कोई मेडिकल स्टोर संचालक नियमों की अवहेलना करता हुआ पाया जाता है,उसके खिलाफ नियमों की अवहेलना होगी।टीबी मुक्त हिमाचल अभियान के अंतर्गत यह नई व्यवस्था अपनाई गई है।इससे टीबी रोगियों की पहचान भी की जाएगी।सरकार का उद्देश्य लंबे समय से खांसी की बीमारी झेल रहे लोगों की समय रहते पहचान कर उन्हें जांच और उपचार से जोडऩा है,ताकि प्रदेश को टीबी मुक्त बनाया जा सके।स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के अनुसार यदि कोई भी दुकानदार किसी मरीज को कफसिरप देता है,तो उसे उसी दिन मरीज का नाम,पूरा पता,मोबाइल नंबर,कौन सा सिरप दिया गया,किस डाक्टर ने दवा लिखी है या फिर मरीज ने स्वयं अपनी मर्जी से दवा खरीदी है,इन सभी विवरणों को टीबी मुक्त हिमाचल ऐप पर अपलोड करना होगा।विभागीय अधिकारियों की मानें,तो लगातार रहने वाली खांसी टीबी का प्रमुख लक्षण हो सकती है,ऐसे में कफसिरप की बिक्री की निगरानी से संभावित मरीजों तक समय रहते पहुंचा जा सकेगा।यदि मरीज को राहत नहीं मिलती है,तो दो सप्ताह बाद फिर से काल कर स्थिति की जानकारी ली जाएगी।इसके बावजूद यदि सुधार नहीं होता है,तो स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीम संबंधित मरीज के घर जाकर टीबी की जांच करेगी।योजना को प्रभावी बनाने के लिए आशा वर्कर्स और अन्य हैल्थ वर्कर्स को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
