पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा है कि अपनी नाकामियों का ठीकरा केंद्र पर फोड़ने की कोशिश करने की बजाय उन्हें राज्य की वित्तीय स्थिति पर ध्यान देना चाहिए,क्योंकि चुनावी समय में दी गई झूठी गारंटियों को पूरा करना केंद्र का दायित्व नहीं है।जयराम ठाकुर ने सोमवार को स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को आधार बनाकर पूरे देश के लिए समान नीतियां बनाती है।उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक युगांतकारी परिवर्तन की घोषणा की है,जिसके तहत ऐतिहासिक मनरेगा योजना के स्थान पर अब एक नया व्यापक कानून वी.बी.जी राम जी को लागू किया जा रहा है।सरकार ने इस बदलाव के तहत बजट में भारी फेरबदल करते हुए नई योजना के लिए 95,692.31 करोड़ का विशाल आबंटन किया है,जबकि मनरेगा के लंबित कार्यों को पूर्ण करने के लिए 30 हजार करोड़ का अतिरिक्त बजट दिया है,जो मुख्य रूप से पुरानी देनदारियों और ट्रांजिशन अवधि के लिए आरक्षित है।दोनों योजनाओं का बजट लगभग सवा लाख करोड़ से अधिक है।यह आंकड़ा ऐतिहासिक है जबकि कांग्रेस नेता शोर मचा रहे हैं कि मनरेगा बंद कर दी है।उन्होंने कहा है कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट यह बताती है कि प्रदेश के लगभग 1.72 लाख कार्य लंबित हैं और 655 पंचायतों में लोगों को एक दिन का भी काम लोगों को नहीं मिल पाया है। राज्य के हिस्से की दिहाड़ी अगस्त से मनरेगा कामगारों को नहीं मिली है।यह नई योजना केवल मजदूरी देने का माध्यम नहीं बल्कि एक मिशन है,जिसमें ग्रामीण परिवारों को अब 100 की बजाय 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई है और मजदूरों के हित में भुगतान की अवधि को 15 दिनों से घटाकर साप्ताहिक (7 दिन) कर दिया गया है।केंद्र अब सामान्य राज्यों से 40 प्रतिशत और हिमाचल जैसे हिमालयी राज्यों से मात्र 10 प्रतिशत हिस्सेदारी ही लेगा लेकिन यहां इस देनदारी से पहले ही सुक्खू सरकार के पसीने छूटने शुरू हो गए हैं।केंद्र के द्वारा हिमाचल में लगभग 191 योजनाएं चल रही हैं।जिसमें राज्य सरकार को मात्र 10 प्रतिशत हिस्सेदारी देनी है,लेकिन राजनीतिक कारणों और कुप्रबंधन के कारण सुक्खू सरकार वह भी समय से नहीं दे रही है।इसका खामियाजा प्रदेश के लोग उठा रहे हैं।जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के संदर्भ में वी.बी.जी राम जी योजना इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार राज्य में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए मनरेगा के तहत कुल 1,71,841 स्पिल ओवर कार्य(अधूरे कार्य) चिन्हित किए गए हैं,जो पिछले वर्षों में स्वीकृत तो हुए लेकिन समय पर पूरे नहीं हो सके।

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