मोदी सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों का किया पर्दाफाश
शिमला। सीटू जिला कमेटी शिमला की महत्वपूर्ण बैठक बुधवार को जिलाध्यक्ष कुलदीप डोगरा की अध्यक्षता में किसान मजदूर भवन, कैथू में आयोजित हुई। बैठक में सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में जिला महासचिव अजय दुलटा सहित बालक राम, रमाकांत मिश्रा, हिमी देवी, अमित कुमार, विवेक कश्यप, प्रताप चौहान, वीरेंद्र लाल पामटा, नोख राम, शांति देवी, दिनेश मेहता, सरीना, निशा, सीताराम, प्रवीण, भूमि, जगदीश, मीना, हेमलता, पंकज, प्रेम, संजीव, ओमप्रकाश, प्रेम प्रकाश, दुष्यंत, राजपाल, प्रदीप, केशव, नरेश, दलविंद्र, शिवराम, समित, उदित व सुधीर मौजूद रहे।
बैठक में निर्णय लिया गया कि 9 जुलाई की राष्ट्रव्यापी हड़ताल को सफल बनाने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा। साथ ही 108 एवं 102 एंबुलेंस कर्मियों के आंदोलन को तेज करने, मिड डे मील, आंगनबाड़ी कर्मचारियों के मुद्दों और सीटू जिला सम्मेलन की तैयारियों पर भी चर्चा हुई।
बैठक को संबोधित करते हुए विजेंद्र मेहरा, कुलदीप डोगरा और अजय दुलटा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार लेबर कोड मजदूरों को गुलामी की ओर धकेलने की साजिश हैं। उन्होंने मांग की कि इन कोडों को तुरंत निरस्त किया जाए। नेताओं ने कहा कि इन कानूनों से 70 प्रतिशत उद्योग और 74 प्रतिशत मजदूर श्रम कानूनों से बाहर हो जाएंगे, जिससे उनकी सुरक्षा और अधिकार खतरे में पड़ जाएंगे।
उन्होंने सरकार से 26,000 रुपये न्यूनतम वेतन, नियमित रोजगार, मनरेगा मजदूरों को न्यूनतम वेतन, श्रमिक कल्याण बोर्ड के लाभ बहाली, असंगठित मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा, ठेका व आउटसोर्स कर्मियों की नीति, ओपीएस की बहाली, न्यूनतम पेंशन 9,000 रुपये और अन्य कई मांगें तत्काल मानने की मांग की।
बैठक में कहा गया कि मोदी सरकार की नवउदारवादी नीतियों के कारण देश में बेरोजगारी, महंगाई, गरीबी और असमानता चरम पर है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को कमजोर किया जा रहा है, जिससे आम जनता का जीवन कठिन हो गया है। पेट्रोल, डीज़ल, रसोई गैस और आवश्यक वस्तुओं के दाम बेतहाशा बढ़ रहे हैं।
सीटू नेताओं ने कहा कि अग्निपथ, फिक्स टर्म रोज़गार, कॉन्ट्रेक्ट प्रथा, नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन, बिजली संशोधन विधेयक जैसे कदम मजदूरों और युवाओं के भविष्य को अंधकारमय बना रहे हैं। सीटू इन सभी मुद्दों को लेकर आम जनता और मजदूर वर्ग को संगठित कर एक निर्णायक आंदोलन की ओर बढ़ेगा।
बैठक में यह संकल्प लिया गया कि मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष तेज किया जाएगा और 9 जुलाई की हड़ताल को ऐतिहासिक बनाया जाएगा।
