भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रभारी श्रीकांत शर्मा ने बुधवार को शिमला ग्रामीण के शोधी और शिमला शहरी के संजौली में आयोजित भव्य तिरंगा यात्रा में भाग लिया।इस अवसर पर प्रदेश महामंत्री बिहारी लाल शर्मा,सह मीडिया प्रभारी प्यार सिंह कंवर,विधानसभा प्रत्याशी रवि मेहता और संजय सूद,वरिष्ठ नेता सुरेश भारद्वाज,जिला अध्यक्ष केशव चौहान सहित पार्टी के मंडल अध्यक्ष और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे।तिरंगा यात्रा के दौरान श्रीकांत शर्मा ने कहा कि 22 अप्रैल देश के लिए एक दर्दनाक स्मृति है,जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 निर्दोष नागरिकों की निर्मम हत्या कर दी गई थी।इस हमले को पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने अंजाम दिया था।उन्होंने बताया कि इस हमले में 25 भारतीयों के साथ एक अन्य नागरिक भी शहीद हुआ था।उन्होंने कहा कि उस वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब के आधिकारिक दौरे पर थे,लेकिन जैसे ही उन्हें घटना की जानकारी मिली,वह तुरंत भारत लौटे और देशवासियों के आक्रोश को समझते हुए आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का संकल्प लिया।श्रीकांत शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार की धरती से यह स्पष्ट कर दिया था कि हम इस आतंकी हमले का बदला लेंगे और ऐसा प्रतिशोध होगा जिसकी आतंकवादी कल्पना भी नहीं कर सकते।उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री की दूरदर्शी सोच और भारतीय सेना की वीरता ही थी,जिसके चलते आतंकियों को उनके अड्डों में घुसकर करारा जवाब दिया गया।उन्होंने बताया कि 22 अप्रैल से 7 मई तक पूरा देश एक निर्णय की प्रतीक्षा कर रहा था और अंततः भारत ने संयम,रणनीति और साहस के साथ ऐसा कदम उठाया,जिसने पाकिस्तान को भी हिला दिया।एयर स्ट्राइक और सर्जिकल स्ट्राइक के बाद अब पाकिस्तान को यह संदेश मिल चुका है कि भारत अब चुप बैठने वाला नहीं।

इस मौके पर भाजपा के प्रदेश महामंत्री बिहारी लाल शर्मा ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की चर्चा करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक सैन्य अभियान नहीं था,बल्कि इसकी रणनीति में एक बड़ा और प्रभावशाली ‘गैर-सैन्य’ पक्ष भी था।उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने सिंधु जल समझौते को स्थगित करने का निर्णय लिया,जिससे पाकिस्तान की 90% जनता और 80% कृषि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि यदि भारत सिंधु नदी के पानी को रोक दे तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की कमर टूट जाएगी।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने जो कहा था हम घुसकर मारेंगे और मिट्टी में मिला देंगे,वह केवल एक कथन नहीं था,बल्कि भारत के आत्मबल और दृढ़ निश्चय का प्रतीक था जिसे पूरा देश आज गर्व से देख रहा है।

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