पूर्व मुख्यमंत्री नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार अपने ओल्ड पेंशन स्कीम के वादे से भी पीछे हट रही है।जिन चुनावी गारंटियों के दम पर कांग्रेस सत्ता में आई है,अब एक-एक करके उनसे किनारा कर रही है।यह बात स्पष्ट रूप से पता चली है कि अब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अधिकारियों को ओपीएस की जगह केंद्र सरकार की यूफिाइड पेंशन स्कीम यूपीएस का विकल्प तलाशने के निर्देश दिए हैं।थुनाग में तिरंगा यात्रा के दौरान जयराम ठाकुर ने कहा कि सुक्खू सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट में ओल्ड पेंशन स्कीम लागू करने का फैसला किया था।कैबिनेट के फैसले के बाद भी यह स्कीम पूरी तरह लागू नहीं हुई है।कैबिनेट के फैसले में ही निगम और बोर्ड के कर्मचारियों को ओपीएस में पहले ही शामिल नहीं किया गया था।जिन विभागों को शामिल भी किया गया था,उनमें कोई स्पष्टता नहीं थी।प्रदेश के कर्मचारियों को भी इसका लाभ ढंग से नहीं मिल रहा है।ऐसे में सरकार द्वारा यूपीएस के लिए विकल्प तलाशने के लिए कहना समझ के परे है।उन्होंने कहा कि यह सरकार खुद को कर्मचारियों हितैषी होने का दंभ भरती है,लेकिन सरकार की नीतियां प्रदेश और कर्मचारी विरोधी की है।यह सरकार प्रदेश के लोगों को न कोई सुविधा दे पा रही है और न ही कर्मचारियों और पेंशनर्स को समय से वेतन और पेंशन।कर्मचारियों का डीए लंबे समय से लंबित है।कर्मचारियों के मेडिकल बिलों का भुगतान भी नहीं हो रहा है। जीपीएफ से पैसे निकालने पर सरकार समय-समय पर कोई न कोई नियम लगा रही है।जिससे लोगों को आवश्यकता पडऩे पर अपने सुख-दुख के लिए जमा किया गया पैसा नहीं मिल रहा है।उन्होंने कहा कि क्या यह प्रदेश के कर्मचारियों के साथ धोखा है।जयराम ठाकुर ने कहा कि जिन गारंटियों के दम पर कांग्रेस सत्ता में आई थी,उन सभी गारंटियों से मुंह मोड़ लेना जनादेश का अपमान है।प्रदेश के लोगों के साथ धोखा है।प्रदेश के लोगों ने कांग्रेस को उनकी 10 गारंटी और उनके झूठे घोषणा पत्र के आधार पर जनादेश दिया था,लेकिन सत्ता में आने के बाद ही कांग्रेस के नेता और सरकार उन गारंटियों को भूल गई तथा घोषणा पत्र को पलट कर भी नहीं देखा।इतना ही नहीं,प्रदेश सरकार ने तो सदन में ही कह दिया था कि हमने ऐसी कोई गारंटी दी ही नहीं।

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