
विधानसभा में मंगलवार को बजट पर चर्चा की शुरुआत नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने की।उन्होंने कहा कि यह चरणबद्ध बजट किसी के समझ नहीं आ रहा है।अढ़ाई साल से विकास ठप है और अगले साल के लिए भी कैपिटल एक्सपेंडिचर बजट में काट दिया गया है।ऐसे में विकास के काम कैसे होंगे।जयराम ठाकुर ने कहा कि लोन को लेकर वर्तमान सरकार झूठा प्रचार कर रही है।सरकार का कहना है कि 17000 करोड़ लोन विरासत में मिला है।जयराम ठाकुर ने कहा कि जब वह मुख्यमंत्री बने थे,तो 50000 करोड़ पूर्व की कांग्रेस सरकारों का था।कोई भी सरकार नो ड्यू सर्टिफिकेट देकर नहीं जाती,इसलिए पुरानी विरासत झेलनी पड़ती है।जयराम ठाकुर ने कहा कि जीएसटी कंपनसेशन और रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट को लेकर भी झूठा प्रचार हो रहा है।कांग्रेस ने सत्ता हथियाने के लिए झूठी गारंटीयां लोगों के सामने रखी।अब इन्हें पूरा करने के चक्कर में मध्यम वर्ग की कमर तोड़ी जा रही है।सरकार के तीसरे बजट में ग्रोथ भी सिर्फ 0.12 फीसदी है।जयराम ठाकुर ने कहा कि उन्होंने अपनी सरकार में कोरोना काल में भी सैलरी और पेंशन लेट नहीं की,लेकिन वर्तमान सरकार गैर जरूरी खर्च कम नहीं कर पा रही है।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर द्वारा बजट चर्चा के दौरान लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि इस बार राज्य सरकार के बजट का आकार ज्यादा इसलिए नहीं बढ़ा,क्योंकि केंद्र सरकार ने रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट में कटौती कर दी है।नए वित्त वर्ष में हिमाचल सरकार को सिर्फ 3257 करोड़ रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट मिलेगी,जो जयराम सरकार के समय एक ही वर्ष में 10000 करोड़ भी मिली है।इसके बावजूद अपने संसाधनों से हमने 70 करोड़ की ग्रोथ के साथ बजट दिया है।मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि जयराम ठाकुर अच्छे वित्त मंत्री होते,तो उस समय राज्य पर लोन का भार भी कम कर सकते थे,लेकिन इन्होंने चुनाव जीतने के लालच में 5000 करोड़ की घोषणाएं बिना बजट के कर दीं।
