राजधानी शिमला में पानी,कूड़ा और प्रॉपर्टी टैक्स की दरों में वृद्धि करने के प्रस्ताव पर शिमला नागरिक सभा भड़क गई है।नागरिक सभा ने विरोध स्वरूप शिमला उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन भी किया।नागरिक सभा के संयोजक संजय चौहान ने बताया कि शहर के लोगों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं में आर्थिक बोझ डालना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।सभा के सैकड़ों कार्यकर्ता उपायुक्त कार्यालय के बाहर इकट्ठा हुए।इस दौरान उन्होंने पानी,कूड़ा और प्रॉपर्टी टैक्स की दर में 10 फीसदी की वृद्धि का विरोध कर नारेबाजी की।

सभा के संयोजक संजय चौहान और सह संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा कि जनता को उनकी मूलभूत सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है।बुनियादी सुविधाओं की दरों में दस प्रतिशत की वृद्धि की नीति वर्ष 2017 में तत्कालीन भाजपा शासित नगर निगम लाई थी।अब कांग्रेस की वर्तमान सरकार और कांग्रेस शासित नगर निगम शिमला भी उसी नीति को लागू कर रही है जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।आरोप लगाया कि नगर निगम शिमला और एसजेपीएनएल अपनी कार्यप्रणाली को सुधारने के बजाय जनता पर आर्थिक बोझ डाल रही है।कहा कि करोड़ों रुपये की बकाया राशि कंपनी प्रभावशाली लोगों तथा सरकारी विभागों से नहीं ले पाई है।आम जनता पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।

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