
चुनाव आयोग ने हिमाचल प्रदेश की चुनावी तिथियों का एलान कर दिया।12 नवंबर को एक चरण में मतदान होगा।इसके लिए 17 अक्तूबर को अधिसूचना जारी की जाएगी।मतगणना आठ दिसंबर को होगी।पिछली बार नौ नवंबर को हिमाचल में चुनाव हुए थे,जबकि 18 दिसंबर को मतगणना हुई थी।

मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने मीडिया से बातचीत में बताया कि हिमाचल में 55 लाख मतदाता 12 नवंबर को मतदान करेंगे। इसके बाद आठ दिसंबर को मतगणना के बाद नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे।

हिमाचल प्रदेश चुनाव का शेड्यूल
अधिसूचना :17 अक्तूबर
नामांकन की आखिरी तारीख:25 अक्तूबर
नामांकन की जांच :27अक्तूबर
नाम वापसी:29 अक्तूबर
मतदान: 12 नवंबर
मतगणना :08 दिसंबर।
चुनाव आयोग ने बताया कि 17 अक्तूबर को गजट नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। वहीं,नामांकन की अंतिम तिथि 25अक्तूबर है।नामांकन की जांच 27 अक्तूबर तक जारी रहेगी। उम्मीदवार 29 अक्तूबर तक अपना नाम वापस ले सकेंगे। 12 नवंबर को हिमाचल में एक ही चरण में मतदान हो जाएगा। इसके बाद 8 दिसंबर को मतगणना के बाद नतीजे घोषित कर देंगे।राज्य में चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की अंतिम तिथि 10 दिसंबर है।

“हिमाचल की मौजूदा राजनीतिक स्थिति”
हिमाचल प्रदेश में कुल 68 विधानसभा सीटें हैं। 2017 में चुनाव के दौरान भाजपा 44 सीटों पर जीत हासिल की थी। कांग्रेस को 21, सीपीआई (एम) को एक सीट मिली थी। दो निर्दलीय प्रत्याशी भी विधायक बने थे,जिन्होंने भाजपा सरकार को समर्थन दे दिया था। बाद में कुछ सदस्यों के निधन के बाद उपचुनाव भी हुए,जिसके बाद सियासी समीकरण में थोड़ा बदलाव हुआ।अभी भाजपा के 43 विधायक हैं और दो निर्दलीयों का भी सरकार को समर्थन है। इसके अलावा कांग्रेस के पास 22 और सीपीआई (एम) के पास एक सीट है। भाजपा के जयराम ठाकुर मुख्यमंत्री हैं।पिछले पांच साल में हिमाचल में तीन उपचुनाव हुए। तीनों में सत्ताधारी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा।
गौर रहे कि सूबे में शुरू से मुख्य लड़ाई भाजपा और कांग्रेस के बीच ही रही है।1983 से अब तक के आंकड़े देखें तो पांच साल भाजपा और पांच साल कांग्रेस ने प्रदेश पर राज किया है।हालांकि,इस बीच लंबे समय तक कांग्रेस के वीरभद्र सिंह ही मुख्यमंत्री रहे।अब उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह कांग्रेस का नेतृत्व कर रहीं हैं।वहीं,भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अगुआई में पार्टी चुनावी मैदान में है।ऐसे में मुख्य मुकाबला इन्हीं दोनों पार्टियों के बीच बताया जा रहा है।हालांकि आम आदमी पार्टी के आने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।
