राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश को जैविक कृषि राज्य में बदलने की परिकल्पना करती है।वर्तमान में 21,473 हेक्टेयर क्षेत्र में 39,790 किसान जैविक खेती कर रहे हैं।सरकार प्रदेश में स्वस्थ एवं रासायनिक तत्व रहित अनाज के उत्पादन के लिए एकीकृत दृष्टिकोण अपनाते हुए जैविक तथा शून्य लागत प्राकृतिक खेती प्रणाली को बढ़ावा दे रही है।

वन्हीं प्रदेश के किसान बागवान भी अब अपने स्तर पर कृषि और बागवानी के नए तौर तरीके अपनाकर अपनी आर्थिकी को मजबूत करने में जुटे हैं।

राजधानी शिमला के साथ लगती पाहल पंचायत के ग्रामीणों ने भी इस दिशा में एक सराहनीय प्रयास किए है,पाहल और आसपास लगती पंचायतों के ग्रामीणों ने संयुक्त प्रयासों से क्षेत्र में न केवल शून्य लागत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया है बल्कि पंचायत के जागरूक किसान अब क्षेत्र में नींबू,अमरूद,आंवला और विभिन्न फलदार पौधे का निशुल्क वितरण कर स्थानीय किसानों को फलदार पौधे की खेती को बढ़ावा देने के प्रयास में जुटे हैं।

पंचायतों में विशेष रूप से चंदन की खेती को लाभकारी बताते हुए,चंदन की पैदावार पर विशेष बल दिया जा रहा है,साईं फाउंडेशन और साक्षी समिति ने किसानों की आर्थिकी को मजबूत करने का बीड़ा उठाया है।

साईं फाउंडेशन और समिति के संयुक्त तत्वावधान में पाहल,चोरंटी,बाग,नलग,बमोत,न्यासैर,और आसपास लगते ग्रामीण इलाकों में फलदार और चंदन सहित विभिन्न प्रजातियों के हजारों पोधे वितरित किए।

इस कार्य में सबसे बड़ा सहयोग क्षेत्र के प्रोग्रेसिव किसान व बुद्धिजीवी डी.डी कश्यप का रहा,कश्यप की मानें तो पाहल और आसपास लगती पंचायतों की जलवायु फलदार पौधे विशेषकर चंदन की खेती के लिए उपयुक्त है,और यंहा चंदन की पैदावार की अपार संभावनाएं हैं।उधर साक्षी समिति के सचिव भूपेन्द्र शर्मा ने स्थानीय किसानों से उन्नत कृषि को अपनाकर अपनी आर्थिकी को मजबूत करने का आह्वान किया है।

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में लगातार गिरता उत्पादन और बढ़ती बीमारियां कृषि-बागवानी क्षेत्र की जटिलताओं को और बढ़ा रही हैं जिससे लाखों किसानों का खेती से मोह भंग हो रहा है,ऐसे में कृषि और बागवानी के क्षेत्र में किसानों को शून्य लागत प्राकृतिक खेती और नए तौर तरीके अपनाकर पैदावार को बढ़ाना होगा,इस दिशा में साईं फाऊंडेशन और साक्षी समिति जैसी गैर सरकारी संस्थाओं की भी अहम भूमिका रहती हैं।

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