हिमाचल प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में पिछले कई  वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे आऊटसोर्स कर्मचारियों के सब्र का बांध अब टूटने लगा है।अल्प वेतन और असुरक्षित भविष्य की मार झेल रहे इन कर्मचारियों ने शिमला के चौड़ा मैदान में एकत्रित होकर अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।हिमाचल प्रदेश आउटसोर्स कर्मचारी यूनियन ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को एक औपचारिक मांग पत्र सौंपकर अपनी लंबित मांगों को जल्द पूरा करने की गुहार लगाई है।

यूनियन ने सरकार को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि वे वर्षों से इस उम्मीद में डटे हैं कि एक दिन उन्हें नियमित किया जाएगा,लेकिन अब उनके सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है।यूनियन के संयोजक अश्वनी शर्मा और सह-संयोजक सोहन लाल तुलिया के हस्ताक्षरों वाले इस मांग पत्र के जरिए स्पष्ट किया गया है कि यदि सरकार ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया,तो हजारों कर्मचारियों का यह संघर्ष एक निर्णायक मोड़ ले लेगा।

आऊटसोर्स कर्मचारियों की पांच प्रमुख मांगें:नौकरी की सुरक्षा:कर्मचारियों की सेवाओं में स्थायित्व सुनिश्चित किया जाए और बिना किसी ठोस कारण के किसी भी कर्मी को नौकरी से न निकाला जाए।स्थायी नीति व समायोजन:आऊटसोर्स कर्मियों के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी नीति बनाई जाए,ताकि उन्हें उनके संबंधित विभागों में मर्ज किया जा सके।श्रम कानूनों की सख्ती से पालना:ठेकेदारों के माध्यम से काम कर रहे कर्मियों पर लेबर लॉ सख्ती से लागू हो,जिससे उन्हें न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा मिल सके।समान काम-समान वेतन:नियमित कर्मचारियों की तर्ज पर ही आऊटसोर्स कर्मियों को भी समान कार्य के लिए समान वेतन का लाभ दिया जाए।दुर्घटना सहायता तुरंत लागू हो:15 अक्तूबर को बिजली कर्मचारियों के अधिवेशन में मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा (दुर्घटना होने पर परिवार को सहायता राशि) को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए।अपनी सेवाओं की सुरक्षा और एक स्थायी नीति की मांग को लेकर शुक्रवार को आऊटसोर्स कर्मचारी यूनियन के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात की और मांगो को जल्द पूरा करने की गुहार लगाई।

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