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हिमाचल संगीत नाटक अकादमी की स्थापना के लिये रंगकर्मियों की पुरजोर मांग उठी है,प्रख्यात नाट्य निर्देशक केदार ठाकुर ने कहा कि साथ लगते राज्यों यँहा तक की केंद्र शासित राज्य चंडीगढ़ में भी संगीत नाटक अकादमी कार्य कर रही है तो ऐसे में हिमाचल में क्यों नहीं?ठाकुर नें बताया कि प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति के संरक्षण संवर्धन के लिए ऐसी स्वायत्त संस्था की आवश्यकता है।केंद्र से पोषित होने के कारण इस अकादमी की राज्य पर वित्तीय निर्भरता नहीं होगी।गेयटी मेँ आयोजित एक थिएटर-परिचर्चा मेँ केदार ठाकुर ने बताया कि रंगकर्म सहित अन्य प्रदर्शन कलाओं के प्रोत्साहन के लिये इस अकादमी की संस्तुति प्रदेश सरकार केंद्र को भेजे।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत में करयाला बांठडा,ठोडा,भगत,धाजा,स्वांग,हरण जैसी लोकनाट्य है,साथ ही कुल्लूवी नाटी,किन्नौरी लोक नृत्य,व अन्य पारंपरिक नृत्य व पारंपरिक लोकगीत शामिल है।इन कलाओं को प्रलेखन व शोध सहित रंग महोत्सवों व रंग कार्यशालाओं के निरंतर आयोजन की आवश्यकता है।  केदार ठाकुर नें कहा की राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय मंचों पर हिमाचल की उपस्थिति अभी शून्य है।केदार ठकुर नें कहा कि वर्तमान में गेयटी को केंद्र में रख कर अकादमी को केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी व संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से संचालित किया जाये।कम लागत,उच्च प्रभाव’ वाले इस प्रस्ताव से राज्य पर वित्तीय बोझ भी नहीं पड़ेगा और प्रदेश का रंग मंच राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच बना पाएगा।

थिएटर परिचर्चा का आयोजन इमोशंस ग्लोबल थिएटर आर्ट द्वारा किया गया तथा गोष्टी के अध्यक्षता श्रीनिवास जोशी ने की।परिचर्चा मेँ भूपेंद्र शर्मा,भारती कुठियाला,अजय गर्ग नें भी थिएटर आर्ट पर अपने पर्चे पढे। इस अवसर पर मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हिमाचल प्रांत प्रचारक प्रताप समयाल,विशेष अतिथि गौरव शर्मा उपस्थित थे।

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