
नेता प्रतिपक्ष और पूर्व सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि विमल नेगी केस में कई अहम सबूत मिटाने की कोशिश हुई है,बड़ा सवाल ये है कि एक पैन ड्राइव पहले छुपाई गई और बाद में उसका सारा डेटा मिटा दिया गया आखिर सरकार किसे बचा रही है जयराम ठाकुर सोमवार को घुमारवीं में रानी अहिल्याबाई होल्कर जन्म त्रिशताब्दी जयंती पर भाजपा की जिला स्तरीय कार्यशाला में बतौर मुख्य वक्ता भाग लेने के बाद मीडिया को संबोधित कर रहे थे।कहा कि जब विमल नेगी का शव बरामद हुआ था,उस समय परिजनों के अनुसार मोबाइल फोन उनकी जेब में साफ दिखा,लेकिन बाद में उसका भी कोई पता नहीं चला।यह कितना बड़ा विरोधाभास है।उन्होंने कहा कि विमल नेगी की संदिग्ध मौत सीधे-सीधे एक बड़े भ्रष्टाचार का मामला है,जिसमें मुख्यमंत्री के करीबी शामिल हैं।यही कारण है कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद सरकार इस मामले को जानबूझ कर सीबीआई को देने से इंकार कर रही है।मुख्यमंत्री पहले दिन से ही इस मामले में झूठ बोल रहे हैं और यही कारण है कि पीड़ित परिवार को उन पर कोई भरोसा नहीं था।जयराम ठाकुर ने कहा कि हमने विधानसभा में यह मांग उठाई कि परिवार सीबीआई जांच की मांग कर रहा है तो मुख्यमंत्री ने वहां भी झूठ कहा कि परिवार तो ऐसी कोई जांच नहीं चाहता है।यह सिर्फ भाजपा राजनीति के लिए सीबीआई जांच मांग रही है,बाद में पीड़ित परिवार हाईकोर्ट पहुंचा और वहां से सीबीआई को केस ट्रांसफर करने के आदेश हुए लेकिन सरकार और उनके अफसरों की हिमाकत तो देखिए कि कोर्ट के आदेशों के बावजूद केस सीबीआई को नहीं भेजा।ऐसे में सवाल उठता है कि कहीं सरकार के दबाव में ही अधिकारी सारे साक्ष्य समाप्त करने में तो नहीं लगे हुए हैं।उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से कांग्रेस सरकार के चहेते अफसर सारी सीमाएं लांघ कर अपने शीर्ष अधिकारियों की बात न मानकर अपनी ही जिद्द पर अड़े हुए हैं वह बहुत बड़ी चिंता की बात है।उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी इस पूरे प्रकरण में सरकार के संरक्षण को देखते हुए मुख्यमंत्री से तत्काल इस्तीफे की मांग करती है।जयराम ठाकुर ने दोहराया कि भाजपा दिवंगत विमल नेगी के परिजनों को न्याय दिलाना चाहती है और इस मामले की हर परत का खुलासा जरूरी है।उन्होंने कहा कि अभी बहुत से राज सामने आने बाकी हैं और सच्चाई उजागर होनी चाहिए।
