
Mandi जनपद के बड़ा देव कमरुनाग का सरानाहुली मेला शुक्रवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया,जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने देवता का आशीर्वाद प्राप्त किया।देवता के लाठी कारदारों ने देव पूजा के लिए सुबह से ही तैयारियां कर ली थीं और जैसे ही देव पूजा का समय आया,कमरुनाग देवता के गुर व कटवाल सहित अन्य कारदारों ने पूजा अर्चना कर काहूलियों की ध्वनि के साथ मूर्ति पूजन कर देव झील (सर) का पूजन किया। इसके बाद देव कमेटी की ओर से सदियों से चली आ रही रीति के अनुसार झील में सोने-चांदी के जेवर बड़ा देव कमरुनाग को अर्पित किए।मेले में आए भक्तों ने भी अपनी मन्नतें पूर्ण होने पर झील में सोना-चांदी,सिक्के और नकदी अर्पित की।इस बार देव कमरुनाग के सरानाहुली मेले में करीब 70 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया तथा मेला शांतिपूर्वक,श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ है।

खास बात यह है कि इस बार 14 वर्ष बाद देव टूंगरासन मेला परिसर पधारे और मंदिर में देवता की मूल पिंडी के साथ विराजे रहे।बता दें कि देव टूंगरासन,देव कमरुनाग के पुत्र के रूप में जाने जाते हैं और सभी देव टीकों में सबसे कनिष्ठ माने जाते हैं।इससे पूर्व देवता वर्ष 2010 में मेला में आए थे। देव टूंगरासन को भी पिता कमरुनाग की तर्ज पर बारिश का देवता माना जाता है,लेकिन मान्यता है कि जब बारिश न होने की दशा में आराध्य किसानों और बागवानों की मांग को पूरा करने में असमर्थता व्यक्त करते हैं,तो ऐसे वक्त पर देव टूंगरासन के दरबार में गुहार लगाई जाती है,खास बात यह है कि वे भयंकर बारिश करते हैं और साथ ही आसमानी गर्जना और बिजली गिरने का डर बना रहता है।इसलिए कई बार देव टूंगरासन से बारिश की गुहार लगाने से हमेशा परहेज ही किया जाता है।
