
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने शिमला शहर में गहराए जल संकट के दृष्टिगत उत्पन्न स्थिति का जायजा लिया।उन्होंने संबंधित अधिकारियों से जलापूर्ति की स्थिति और व्यवस्थाओं की जानकारी ली। इस संबंध में उन्होंने उपायुक्त शिमला आदित्य नेगी से भी फोन पर बातचीत कर जिले में आपदा से प्रभावित लोगोें को राहत और जलापूर्ति सुचारू बनाए जाने के लिए उचित दिशा-निर्देश दिए।उन्होंने निर्देष दिए कि राहत कार्यों में और तेजी लाई जाए।शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड (एस.जे.पी.एन.एल) के प्रबंधन निदेशक पंकज ललित ने इस बाबत राज्यपाल को वास्तुस्थिति से अवगत करवाया।उन्होंने बताया कि शहर के लिए गुम्मा पंपिंग स्टेशन से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित बनाई जा रही है।जबकि गिरि जलस्रोत से भारी गाद के कारण आपूर्ति नहीं हो पा रही है।उन्होंने बताया कि टैंकरों के माध्यम से भी शहर में जलापूर्ति सुनिश्चित की जा रही है और इसके लिए करीब 90 टैंकर लगाए गए हैं।राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक आपदा की इस आपात स्थिति में जिला व पुलिस प्रशासन पूरी मुस्तैदी के साथ कार्य कर रहा है।कुल्लू व मनाली में फंसे पर्यटकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। सड़कों की बहाली के लिए युद्ध स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल तथा वायु सेना के हैलीकाप्टर की मदद से बचाव कार्य सुनिश्चित बनाए जा रहे हैं।उन्होंने चंद्र ताल झील में फंसे पर्यटकों को निकालने के लिए किए जा रहे प्रबंधों की भी जानकारी हासिल की,उन्होंने कहा कि यहां रेस्क्यू में लगे प्रशासन, आई.टी.बी.पी और बी.आर.ओ. की टीमें युद्ध स्तर पर सड़क बहाली का कार्य कर रही हैं।उन्होंने लोगों से इस आपदा की स्थिति में सहयोग की अपील की है।
इस बीच,राज्यपाल ने कार्यवाहक पुलिस महानिदेषक सतवंत अटवाल से भी राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली उन्होंने इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देष दिए, अटवाल ने बताया मनाली मेें फंसे पर्यटकों को मण्डी लाया गया है।कसोल में रास्ता क्षतिग्रस्त है जिसे बहाल करने के प्रयास जारी हैं।श्री शुक्ल ने विभिन्न जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने की स्थिति में वैकल्पिक मार्गों को उपयोग में लाया जाना चाहिए ताकि आवाजाही बनी रहे।उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में गैस व अन्य खाद्य आपूर्ति को सुचारू बनाए जाने के लिए प्रभावी पग उठाए जाएं तथा अस्थायी तौर पर बिजली,पानी व मोबाइल फोन कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए ठोस पग उठाए जाएं।उन्होंने आपदा प्रभावितों के पुनर्वास के लिए हर संभव प्रयास करने के निर्देश दिए हैं।उन्होंने कहा कि फौरी राहत के तौर पर केेंद्रीय गृह मंत्रालय ने हिमाचल सरकार को आपदा प्रबंधन के लिए 180 करोड़ रुपये की पहली किश्त भी जारी कर दी है।उन्होंने बुधवार को सोलन जिले के शामती क्षेत्र का भी दौरा किया तथा भू-स्ख्लन से हुए नुकसान का जायजा लिया।उन्होंने कहा कि यहां कुछ मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं जिसके लिए उन्होंने जिला प्रशासन से मदद के लिए तुरंत दिशा-निर्देश दिए हैं।उन्होंने कहा कि वे स्वयं प्रभावित क्षेत्रों में जाकर स्थिति का जायजा लेंगे।
