
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन सदन में पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक(कैग)की रिपोर्ट को लेकर विपक्ष ने सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोला है।नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया है कि कैग रिपोर्ट ने राज्य सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन और सत्ता संरक्षित भ्रष्टाचार की पूरी तरह से पोल खोल दी है।श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर शिमला स्थित गंज मंदिर में दर्शन करने पहुंचे जयराम ठाकुर ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि आने वाले समय में इस सरकार के चेहरे से नकाब पूरी तरह उठ जाएगा।पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि चाहे ऑनलाइन टेंडर की बात हो,खरीद में पारदर्शिता का मामला हो या टैक्स वसूली का,सुक्खू सरकार हर मोर्चे पर फिसड्डी साबित हुई है।इसका सीधा नुकसान सरकारी कोष को हो रहा है।उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार के हर कदम से प्रदेश को नुक्सान हो रहा है और सरकारी खजाना केवल मित्र मंडली और कुछ गिने-चुने लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए लुटाया जा रहा है।राजस्व और राजकोषीय घाटे के लगातार बढ़ने पर चिंता जताते हुए जयराम ठाकुर ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने बिना बजट के करीब 438 करोड़ रुपए खर्च कर दिए,जबकि दूसरी ओर 673 करोड़ रुपए की योजनाओं का प्रावधान होने के बावजूद कोई खर्च नहीं किया गया।यह सरकार के घोर वित्तीय कुप्रबंधन को दर्शाता है।जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि सबसे बड़ा घोटाला सरकारी और सार्वजनिक उपक्रमों में वस्तुओं,सेवाओं और कार्यों की खरीद व टैंडर प्रक्रिया (ई-प्रोक्योरमैंट सिस्टम)में सामने आया है।उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया में एक ही आईपी एड्रैस,यहां तक कि विभागीय आईपी एड्रैस का इस्तेमाल करके बोलियां लगाई गईं।इन बोलियों की राशि में बहुत मामूली अंतर था।उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यालयों में बैठकर संसाधनों का दुरुपयोग करते हुए ई-टैंडर डाले गए,जो विभाग और ठेकेदारों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है।मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर निशाना साधते हुए नेता प्रतिपक्ष ने पूछा कि क्या यही सुक्खू सरकार के व्यवस्था परिवर्तन का मॉडल है?उन्होंने मुख्यमंत्री को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें अब संभल जाना चाहिए और तानाशाही रवैया छोड़कर संविधान के दायरे में रहकर प्रदेश के हित में काम करना चाहिए।
