
हिमाचल में पंचायती राज चुनाव के लिए अब आगे की प्रक्रिया तेज हो गई है।सभी जिलों के उपायुक्तों को सात अप्रैल से पहले अब आरक्षण रोस्टर नए नियमों के अनुसार नोटिफाई करना है।अब इन्हें पंचायती राज विभाग को ड्राफ्ट बनाकर भेजने की जरूरत नहीं है।पंचायती राज विभाग ने हाई कोर्ट से आए फैसले के आधार पर गुरुवार को ही रोस्टर से संबंधित नए निर्देश जिलों को भेज दिए थे,हालांकि इससे पहले जब आरक्षण रोस्टर नियमों में बदलाव नहीं हुआ था,तो सभी जिलों से एक बार ड्राफ्ट मांगा गया था।अब ड्राफ्ट भेजने की कोई बाध्यता नहीं है।आरक्षण रोस्टर फाइनल होते ही राज्य चयन आयोग का काम शुरू हो जाएगा।आयोग पंचायत चुनाव शेड्यूल जारी करेगा और इसके साथ ही चुनाव आचार संहिता लग जाएगी।इसका असर राज्य सरकार के कामकाज पर भी होगा।इससे पहले पंचायतों के पुनर्गठन पर हाईकोर्ट में केस जाने के बाद 16 ग्राम पंचायतों में चुनाव नहीं होंगे।अब कुल 3757 पंचायतों के लिए आरक्षण रोस्टर जारी होगा।उम्मीद है कि अप्रैल और मई महीना पंचायत चुनाव की प्रक्रिया में चला जाएगा।हिमाचल में सामान्य कार्यकाल के तौर पर पंचायत चुनाव की प्रक्रिया जनवरी महीने में शुरू होनी थी,लेकिन डिजास्टर एक्ट लगा होने के कारण इसे आगे डेफर किया गया था।इस बार आरक्षण रोस्टर के लिए राज्य सरकार ने नियमों में बदलाव किया है।इस बदलाव पर विपक्षी दल भाजपा ने आपत्ति जताई थी।बजट सत्र के दौरान भी विपक्षी दल ने इसका विरोध किया।हालांकि अभी तक आरक्षण नियमों में बदलाव को किसी ने कोर्ट में चुनौती नहीं दी है।
