
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शनिवार को मुख्यमंत्री सुखी परिवार योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले करीब एक लाख बीपीएल परिवारों की भलाई के लिए तीन खास गारंटी लागू करने की घोषणा की।मुख्यमंत्री ने राज्य का बजट पेश करते हुए कहा कि करीब एक लाख गरीब परिवारों को ”सुखी परिवार” में बदलने की पहल के तहत कवर किया जाएगा।उन्होंने बताया कि तीन खास गारंटी में 300 यूनिट फ्री बिजली,1500 रुपए महीने की पेंशन और पक्के घरों के लिए वित्तीय मदद शामिल है।उन्होंने कहा कि योग्य लाभार्थियों की पहचान करने के लिए एसडीएम,डीसी,बीडीओ और पंचायतों द्वारा पहले ही विस्तृत सर्वे किए जा चुके हैं।उन्होंने कहा,”इस खास हस्तक्षेप से गरीबों को उनके हक मिलेंगे।मुख्यमंत्री ने आगे घोषणा की कि इंदिरा गांधी प्यारी बहना स्कीम का तीसरा चरण”जल्द ही शुरू किया जाएगा,जिसमें योग्य महिला लाभार्थियों को 1,500 रुपए की वित्तीय मदद दी जाएगी।

सीएम सुक्खू ने मनेरगा पर केंद्र के फैसले पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे राज्य में ग्रामीण रोजगार पर असर पड़ सकता है।उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि राज्य सरकार रोजी-रोटी बनाए रखने के लिए अतिरिक्त चार करोड़ मैन-डे बनाकर इसकी भरपाई करेगी।उन्होंने खेती को एक मुख्य रोजगार क्षेत्र बताते हुए कहा कि प्राकृतिक जैविक संसाधनों और ग्रीन पहल को मजबूत किया जाएगा।किसानों को लगभग 12 लाख जननद्रव्य पौधे बांटे जाएंगे,जबकि बायो-चार उत्पादन और चीड़ की पत्तियां/जैसी गतिविधि को रोजी-रोटी के विकल्प के तौर पर बढ़ावा दिया जाएगा।सरकार ने ग्रामीण विकास में 150 पंचायत सचिव पद भरने,सौ प्रतिशत पंचायती राज ऑडिट और पंचायत संसाधन सेंटर बनाने की घोषणा की।सभी पंचायतों को आधुनिक बनाने के लिए एक खास अभियान भी चलाया जाएगा।रोज़गार बढ़ाने के लिए,500 युवाओं को ई-टैक्सी सब्सिडी दी जाएगी,जबकि 500 ई-रिक्शा को डीबीटी आधारित पूंजीगत अनुदान के ज़रिए समर्थन किया जाएगा, जिसका कुल खर्च लगभग 500 करोड़ रुपए होगा।इसके अलावा सरकार 500 शिक्षण संस्थाओं में कैंपस प्लेसमेंट प्रकोष्ठ को मज़बूत करने और शिमला हाट और प्रीमियम शोरूम जैसी पहलों के ज़रिए स्वयं सहायता ग्रुप को बढ़ावा देने की भी योजना बना रही है।
