स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने स्वदेशी टेटनस और वयस्क डिप्थीरिया (टीडी) वैक्सीन की शुरुआत करते हुए इसको स्वास्थ्य अवसंरचना क्षेत्र में मील का पत्थर बताया और कहा कि यह स्वदेशी वैक्सीन स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के प्रति उनकी सरकार की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।जेपी नड्डा ने शनिवार को हिमाचल प्रदेश के कसौली स्थित केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (सीआरआई) में निर्मित टेटनस और टीडी वैक्सीन का शुभारंभ करते हुए सीआरआई के वैज्ञानिकों,तकनीकी विशेषज्ञों और कर्मचारियों को बधाई दी और टिटनेस और टीडी वैक्सीन शुरु करने को महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक अवसर बताया।उनका कहना था कि यह शुभारंभ राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा की रक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्वदेशी रूप से निर्मित टीडी वैक्सीन का शुभारंभ स्वास्थ्य और चिकित्सा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना की दिशा में एक ठोस कदम है।इस वैक्सीन के औपचारिक शुभारंभ के साथ,अब इसे सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी)के तहत आपूर्ति के लिए पेश किया गया है।उन्होंने बताया कि केंद्रीय अनुसंधान संस्थान अप्रैल तक यूआईपी को 55 लाख खुराकें उपलब्ध कराएगा और केंद्र सरकार के सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम को और अधिक मजबूती प्रदान करने के लिए उत्पादन में धीरे-धीरे वृद्धि करेगा।

श्री नड्डा ने कहा कि भारत को व्यापक रूप से ‘विश्व के औषधालय’के रूप में मान्यता है और भारत विश्व स्तर पर अग्रणी टीका निर्माताओं में शामिल है।उन्होंने कहा कि सीआरआई जैसे संस्थानों ने इन मानकों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।उनका कहना था कि टीके और दवाओं के विकास में लंबा समय लगता था,टेटनस के टीके को विकसित होने में विश्व स्तर पर दशकों लग गए,तपेदिक की दवाइयों को विकसित होने में लगभग 30 साल लगे और जापानी एन्सेफलाइटिस के टीके के लिए लगभग एक सदी का वैज्ञानिक प्रयास करना पड़ा।इसके विपरीत,कोविड-19 महामारी के दौरान,भारत ने नौ महीनों के भीतर दो स्वदेशी टीके विकसित किए और बूस्टर खुराक सहित 220 करोड़ से अधिक खुराकें दीं।उन्होंने यह भी बताया कि कोविड-19 टीकाकरण प्रमाण पत्र डिजिटल रूप से वितरित किए गए,जो सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में भारत के डिजिटल परिवर्तन को दर्शाता है।भारत के वैश्विक एकजुटता प्रयासों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वैक्सीन मैत्री पहल के तहत भारत ने लगभग 100 देशों को टीके उपलब्ध कराए,जिनमें से 48 देशों को टीके मुफ्त में मिले।उन्होंने कहा कि सीआरआई जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के योगदान से घरेलू और वैश्विक दोनों जरूरतों को पूरा करने की भारत की क्षमता मजबूत हुई है।

उनका कहना था कि सीआरआई,गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (जीएमपी)मानकों के तहत टीकों का निर्माण करने वाला पहला सरकारी संस्थान है,जो सार्वजनिक क्षेत्र की टीका निर्माण इकाइयों के आधुनिकीकरण और पुनरुद्धार को दर्शाता है।उन्होंने आयुष्मान भारत यानी प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का जिक्र करते हुए कहा कि यह विश्व का सबसे बड़ा सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम है,जिससे 62 करोड़ से अधिक लोगों को लाभ मिल रहा है।उन्होंने आगे बताया कि 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिक,सामाजिक-आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना,इस योजना के तहत प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक के स्वास्थ्य बीमा के पात्र हैं।

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