
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने चर्चा में भाग लेते हुए आरडीजी के मुद्दे पर सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसे लेकर सारा दोष भाजपा और केंद्र सरकार पर डालने का प्रयास किया जा रहा है,जबकि यह मूल रूप से वित्त विभाग से जुड़ा विषय है,और इसे मुख्यमंत्री को स्वयं सदन में रखना चाहिए था।उन्होंने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री ने वही तथ्य सदन में रखे जो सरकार के अनुकूल थे।उन्होंने कहा कि सीएम सुझाव नहीं सुनते,सुनते हैं तो मानते नहीं हैं।उन्होंने सीएम को अपने मित्रों को दी गई नियुक्तियों पर विचार करने की सलाह दी तथा कहा कि सरकार ने फिजूल खर्ची नहीं रोकी तो आने वाले समय में कर्मचारियों के वेतन,भत्ते,पैंशन,जीपीएफ देने में परेशानी होगी।ऐसे में सरकार को कड़े फैसले लेने होंगे।विपक्ष इन फैसलों की समीक्षा करेगा तथा तय करेगा कि इनका समर्थन करना है या नहीं।

इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा 2032 तक हिमाचल को सबसे समृद्ध राज्य बनाने के दावे पर ठोस फार्मूला सार्वजनिक करने की मांग की।उन्होंने कहा कि सरकार हर मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रही है,जबकि आर्थिक संकट से निपटने के लिए कठोर फैसले जरूरी हैं।वाटर सैस,लॉटरी,भांग खेती और ग्रीन एनर्जी नीति पर भी स्पष्टता नहीं है।जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल का इतिहास रहा है कि 1993-94 में राज्य पर कोई कर्ज नहीं था।कर्ज की शुरूआत कांग्रेस सरकार के समय हुई।वर्ष 2013-14 में राज्य का कर्ज 28,707 करोड़ रुपए तक पहुंचा और 2017 तक इसमें 67 प्रतिशत की बढ़ौतरी हुई,जिससे कर्ज 48 हजार करोड़ रुपए से अधिक हो गया।उन्होंने दावा किया कि 2017 से 2022 के बीच कुल कर्ज 69,600 करोड़ रुपए रहा,जिसमें उनकी सरकार के समय 44 प्रतिशत की वृद्धि हुई,लेकिन यह पिछली सरकारों की तुलना में 23 प्रतिशत कम थी।नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर गारंटियों और गैर-जिम्मेदार फैसलों का आरोप लगाते हुए कहा कि 10 गारंटियों,मुफ्त बिजली,महिलाओं को सहायता,दूध-गोबर खरीद और लाखों नौकरियों जैसे वायदों से वित्तीय दबाव बढ़ा।उन्होंने कहा कि आरडीजी पूरे 17 राज्यों के लिए बंद हुई है,न कि केवल हिमाचल के लिए।उन्होंने सुझाव दिया कि इस मुद्दे को तर्क,संयम और आपसी संवाद से सुलझाया जाना चाहिए।अधिकार के साथ जिम्मेदारी का भी अहसास जरूरी है।जयराम ठाकुर ने कहा कि सीपीएस कैबिनेट के दर्जे के साथ बनाएं।सीपीएस को बचाने के लिए 10 करोड़ से अधिक का पैसा खर्च कर दिया।अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के वेतन में एक लाख की बढ़ौतरी कर दी।उसके बावजूद आर्थिक संकट नहीं दिखा।जयराम ठाकुर ने कहा कि यदि आप चाहते हैं कि केंद्र में पक्ष रखा जाए तो हम देख लेंगे कि कैसे रखना है।आप विपक्ष को बाध्य नहीं कर सकते हैं हम विवेक से व चर्चा के बाद तय करेंगे कि कहां पर पक्ष रखना है।जो फैसले बिना सोचे समझे लिए जा रहे हैं वह हिमाचल के लिए आपदा के समान हैं।इस मामले में सबको राजनीति छोड़नी चाहिए।

सांसद नहीं करते हिमाचल के हित की बात:राठौर /विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि आरडीजी के मुद्दे पर लंबी चर्चा करने की आवश्यकता नहीं है।उन्होंने कहा कि मोदी को पीएम बनाने में हिमाचल का भी योगदान है।हिमाचल के हित की बात सांसद नहीं करते हैं।इस मुद्दे पर इकट्ठा मिलकर जाएं,हमारी पीएम से कोई लड़ाई नहीं है,लेकिन जहा हमें लगेगा कि लोकतंत्र में गलत हो रहा है उस पर बोलेंगे।

सरकारों को स्वयं से करनी होगी शुरूआत:रणधीर/विधायक रणधीर शर्मा ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि जितना यह मुद्दा गंभीर है उतनी गंभीर राज्य सरकार नहीं है।प्रदेश को इस मुश्किल से कैसे निकालें उस पर चर्चा होनी चाहिए,लेकिन इस पर राजनीति हो रही है।इस दौरान उन्होंने सरकार की फिजूल खर्ची का मामला उठाया तथा कहा कि इसे रोकने के लिए स्वयं से शुरूआत करनी होगी।उन्होंने कहा कि सरकार कांग्रेस की है यदि नहीं चलती तो छोड़ दे,भाजपा चला कर दिखाएगी।

