
(संजीव ठाकुर)हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए धारा 163-A को “पूर्ण रूप से मनमानी और असंवैधानिक” करार देकर रद्द कर दिया।इस धारा के तहत राज्य सरकार ने अवैध कब्जों के नियमितीकरण का प्रावधान किया था,मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति की खंडपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह प्रावधान न केवल संविधान के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करता है,बल्कि सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जों को बढ़ावा देता है।

अदालत ने कहा कि इस तरह के कानून,कानून के शासन और नागरिकों के समानता के अधिकार के विपरीत हैं,इस फैसले का स्वागत करते हुए एडवोकेट सुमन ठाकुर ने कहा कि“यह निर्णय ईमानदार नागरिकों के हित में है और अवैध कब्जों को वैध ठहराने की प्रवृत्ति पर रोक लगाएगा।यह न्यायपालिका की साख और जनहित में लिया गया ऐतिहासिक कदम है,न्यायालय ने न केवल धारा 163-A बल्कि इसके तहत बनाए गए सभी नियमों को भी निरस्त कर दिया।साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया कि अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और सार्वजनिक भूमि को जल्द से जल्द वापस हासिल किया जाए।
