
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के निर्देश पर हिमाचल उद्योग विभाग के अधिकारियों ने हैदराबाद और मुंबई में अग्रणी एपीआई निर्माताओं,संभावित निवेशकों एवं प्रमुख फार्मा संघों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें की।इन बैठकों का उद्देश्य ऊना जिले में विकसित किए जा रहे बल्क ड्रग पार्क को लेकर निवेशकों की रुचि जानना और उनकी अपेक्षाओं को समझना था।इन बैठकों में बल्क ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन,इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन,फार्मा एक्सिल,तेलंगाना एसोसिएशन ऑफ फार्मा एंड केमिकल इंडस्ट्रीज जैसे प्रतिष्ठित फार्मा संगठनों ने भागीदारी निभाई। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार,राज्य सरकार के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व आरडी नज़ीम,आईएएस,अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) ने किया।उनके साथ डॉ.यूनुस निदेशक उद्योग,तिलक राज शर्मा,अतिरिक्त निदेशक(उद्योग) तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।इस अवसर पर निदेशक उद्योग द्वारा एक विस्तृत प्रस्तुति के माध्यम से बल्क ड्रग पार्क की व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत की गई तथा हिमाचल प्रदेश के फार्मा इकोसिस्टम का परिचय दिया गया।उन्होंने बताया कि राज्य में पहले से ही 650 से अधिक फार्मास्युटिकल फॉर्मूलेशन इकाइयां कार्यरत हैं,जिनमें कई अग्रणी कंपनियां शामिल हैं,जो राज्य के मजबूत फार्मा आधार को दर्शाता है।उन्होंने आगे बताया कि यह प्रस्तावित बल्क ड्रग पार्क प्रतिवर्ष 38,000 करोड़ से अधिक की एपीआई मांग को पूरा करेगा।यह न केवल हिमाचल प्रदेश में बल्कि पंजाब,हरियाणा,उत्तराखंड,उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे पांच पड़ोसी राज्यों में भी सप्लाई भेजेगा। यह पार्क हरोली तहसील में 1,405 एकड़ में फैला होगा,जो पंजाब सीमा के समीप है और उत्कृष्ट कनेक्टिविटी तथा अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा प्रदान करेगा।पार्क में सीईटीपी, स्टीम एवं पावर जनरेशन,खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र, गोदाम,गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशालाएं एवं सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जैसी प्रमुख साझा सुविधाएं उपलब्ध होंगी।इन बैठकों में डॉ रेडिज,अल्केम लैब्स,सन फार्मा,एबट,अरबिंदो फार्मा,केवलेंट्स लैब्स,टॉरेंट फार्मा,मैनकाइंड फार्मा और महिमा लाइफ साइंसेज जैसी अग्रणी फार्मा कंपनियों सहित थर्मेक्स एवं बालाजी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञों सहित 150 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।प्रतिभागियों ने आगामी पार्क में निर्माण इकाइयां स्थापित करने में गहरी रुचि दिखाई।इस बैठक के दौरान संभावित निवेशकों ने सीईटीपी एवं स्टीम जनरेशन शुल्क जैसे परिचालन पहलुओं पर प्रश्न उठाए और शुल्क निर्धारण में पारदर्शिता तथा स्थायित्व की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य सरकार को प्रतिस्पर्धी लागत बनाए रखने हेतु उपयोगिता शुल्कों में अनावश्यक वृद्धि से बचाव के लिए स्पष्ट और स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) ने निवेशकों को आश्वस्त किया कि उनकी चिंताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और उपयोगिताओं के प्रबंधन हेतु एक मजबूत,किफायती एवं विश्वसनीय ढांचा विकसित किया जा रहा है।

सीमेंट उद्योग स्थापित करने पर भी हुई बैठक।
उद्योग विभाग द्वारा सीमेंट उद्योग के प्रमुख खिलाड़ियों के साथ भी एक बैठक आयोजित की गई,जिसमें राज्य सरकार द्वारा एसबीआई कैप्स की सलाहकार भूमिका में दो चूना पत्थर खनिज ब्लॉकों की नीलामी हेतु शीघ्र जारी होने वाले एनआईटी (निविदा सूचना) के संदर्भ में चर्चा की गई।यह पहल राज्य की समृद्ध चूना पत्थर खनिज संपदा के दोहन हेतु निजी क्षेत्र की भागीदारी को आमंत्रित करेगी और ग्रीनफील्ड एवं ब्राउनफील्ड सीमेंट परियोजनाओं के माध्यम से स्थानीय रोजगार सृजन एवं औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करेगी।इस बैठक में अल्ट्राटेक,अडानी,नुवोको विष्टा जैसी प्रमुख सीमेंट कंपनियों ने भाग लिया और निविदा में रुचि दर्शाई।
