सर्वोच्च न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा अनुबंध कार्यकाल की इन्क्रीमैंट देने के फैसले पर रोक लगा दी है। प्रदेश सरकार ने उच्च न्यायालय के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।सरकार के अनुसार 1996 से 1999 के बीच लगाए गए जेबीटी अध्यापकों के साथ अनुबंध हुआ था कि उन्हें उपरोक्त अवधि के दौरान इन्क्रीमैंट नहीं मिलेगी।प्रदेश सरकार ने दलील दी थी कि वर्ष 2003 में यह प्रावधान भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में डाला गया कि अनुबंध कर्मचारियों को फिक्स्ड वेतन मिलेगा,जबकि उपरोक्त समय की वार्षिक वेतन वृद्धि नहीं मिलेगी।राज्य सरकार के अनुसार राज्य सरकार एवं कर्मचारियों के मध्य हुए अनुबंध की अनदेखी करते हुए हाईकोर्ट ने ये आदेश पारित किए।दलील दी गई है कि उच्च न्यायालय ने विभिन्न फैसले जो उपरोक्त नियमों के व्याख्या नहीं करते थे,उन पर अपने फैसले को आधारित करते हुए यह फैसला दिया है। प्रदेश सरकार के अनुसार भर्ती एवं पदोन्नति नियमों को उच्च न्यायालय ने न तो रद्द किया और न ही इस फैसले में उन पर चर्चा की गई याचिकाकर्त्ता ने लगभग 20 वर्षों के बाद याचिका दायर की थी परंतु अपने अनुबंध की शर्तों को चुनौती नहीं दी थी।प्रदेश उच्च न्यायालय ने बिना नियमों को रद्द किए वार्षिक वेतन वृद्धि देने का आदेश दे दिया,जो पूर्णतया गलत है।

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