दवा विक्रेंताओं सहित अन्य दुकानदारों और सामाजिक न्याय विभाग को भी देंगे ज्ञापन।

हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति शिमला इकाई की बैठक जिलाध्यक्ष जीयानन्द शर्मा की अध्यक्षता में हुई।बैठक में स्वास्थ्य,जलवायु परिवर्तन,शिक्षा जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।समिति ने नशे से लगातार हो रही मौतों पर चिंता जताई और सरकार से इसे रोकने के लिए ठोस नीति बनाने का आहवान किया।समिति ने हाल ही में संजौली क्षेत्र में नशे के कारण हुई दो नौजवानों की मौत पर भी शोक प्रकट किया।समिति की जिला सचिव सुमित्रा चंदेल ने कहा कि यह सही है कि पुलिस प्रशासन लगातार नशे के खिलाफ कार्यवाही कर रहा है और नशा तस्करों को पकड़ रहा है लेकिन सप्लाई चेन पर प्रहार के साथ-साथ अगर नशे की मांग को कम करने के प्रयास न किए गए तो यह मुहिम अधूरी है।उन्होंने कहा कि इसके लिए समाज को सचेत होना बहुत ज़रूरी है।चंदेल ने कहा कि हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति आगामी 8 मार्च अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर शिमला में एक रैली का आयोजन करेगी।इस दौरान दवा विक्रेताओं व्यापार मण्डल और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग से भी अपील की जाएगी कि वे नशे को रोकने में सहयोग करें।बिना डॉक्टर की पर्ची के कोई भी ऐसी दवा न बेचे जिससे नशा होता हो।पान-मसाला की दुकानों से भी अपील की जाएगी।

सुमित्रा चंदेल ने कहा कि शिवरात्रि के लिए समिति शहर में एक अभियान चलाएगी जिसमें इस त्यौहार को नशे से न जोड़कर इसे सांस्कृतिक स्वरूप में मनाएं।समिति ने चिट्टा तस्करी में सरकारी अधिकारियों,डॉक्टरों,कर्मचारियों की संलिप्तता होने पर भी चिंता जताई।समिति के राज्य सचिव सत्यवान पुण्डीर ने कहा कि इस गंभीर मामाले से जुड़ी हर कड़ी की गहन जांच होनी चाहिए।पुण्डीर ने कहा कि जिन संस्थाओं और लोगों पर समाज को नशे से बचाने की जिम्मेदारी है उसी विभाग के अधिकारी अगर नशा तस्करी में लिप्त हो जाएं तो सरकार और प्रशासन को इसें गंभीरता से लेना चाहिए।क्योंकि जो सामाजिक संस्थाएं और पंचायतें नशा रोकने के लिए आगे आ रही हैं वे ऐसी घटनाओं से हतोत्साहित होंगी।सत्यवान पुण्डीर ने कहा कि सरकार को नशे के खात्मे के लिए एक समग्र और कारगर नीति बनानी होगी अन्यथा जिस प्रकार आज ‘चिट्टा सबकी चिता का विषय है कल कोई और नशा इसका विकल्प हो जाएगा।उन्होंने कहा कि सरकार को जन प्रतिनिधियों,नागरिक तथा सामुदायिक संगठनों को शामिल करते हुए नशे के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने की आवश्यकता है।उन्होंने कई आयोजनों में नशे को सार्वजनिक मान्यता होने पर भी चिंता जताई।समिति ने नार्कोटिक्स एवं पुलिस प्रशासन की सराहना करते हुए कहा कि जिला और प्रदेश की पुलिस नशे के खिलाफ ज़ोरदार तरीके से प्रहार कर रही है और नशा तस्करों के गिरोहों का पर्दाफाश कर रही है।

राज्य सचिव ने कहा कि सरकार को निजी स्तर पर खोले गए नशामुक्ति केन्द्रों पर भी कड़ी निगरानी रखनी चाहिए।उन्होंने कहा कि समिति की हमेशा यह मांग रही है कि नशामुक्ति केन्द्र और पुनर्वास केन्द्रों को सरकारी तौर पर बनाना और चलाना चाहिए।उन्होंने कहा कि खेद की बात है कि विभाग ठोस कार्ययोजना के अभाव में नशामुक्ति के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए मिली केन्द्रीय राशि को भी खर्च नहीं कर पा रही है।ऐसे गंभीर मु्द्दे पर भी अगर प्रदेश से केन्द्र का पैसा बिना खर्च किए वापिस जा रहा है तो इससे गंभीर बात क्या होगी।राज्य सचिव ने कहा कि ज्ञान विज्ञान समिति ने नशे के खिलाफ अभियान को मिशन मोड में चलाने का सुझाव दिया था और कहा था कि मुख्यमंत्री कार्यालय से इसकी निगरानी हो।वहां एक ऐसा सेल बनें जो हर दिन नशे के खिलाफ होने वाली कार्यवाही को देखे और हस्तक्षेप के लिए सुझाव दे।लेकिन सरकार की ओर से अभी तक इन सुझावों को लेकर कोई ठोस कार्ययोजना देखने को नहीं मिल रही।पुण्डीर ने कहा कि समिति आने वाले 7 अप्रैल को विभिन्न संस्थओं और शासन एवं प्रशासन के प्रतिनिधियों का एक बड़ा अधिवेशन आयोजित करने जा रही है और नशे के खिलाफ एक संयुक्त अभियान मंच का गठन करेगी।उन्होने शिक्षण संस्थाओं के माध्यम से किशोरावस्था के बदलावों पर जागरूकता एवं पेरेंट्स का ज़िम्मेदारपूर्ण रवैया तथा मां की केंद्रीय भूमिका के तौर पर योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने की ज़रूरत पर बल दिया।एडिक्ट अपराधियों से जेलों में भी अन्य अपराधियों से अलग व्यवहार,डिटॉक्सिफाई व डी-एडिक्ट करने तथा कांउसलिंग करने का प्रावधान होना चाहिए।नशे के मुद्दे के अलावा बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण,बढ़ते व्यवसायिकरण और आम आदमी तक कम हो रही पहुंच पर भी चर्चा की गई।इसके लिए जन स्वास्थ्य अभियान के साथ मिलकर जागरूकता पैदा करने की योजना बनाई गई।जलवायु परिवर्तन को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई।समिति ने मांग की कि सरकार को विश्वविद्यालयों से मिलकर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पर शोध करवाना चाहिए।

