
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी माक्र्सवादी राज्य कमेटी हिमाचल प्रदेश का तीन दिवसीय सम्मेलन शिमला के कालीबाड़ी हॉल में संपन्न हुआ।सम्मेलन को पार्टी पोलिट ब्यूरो सदस्य कॉमरेड सुभाषिनी अली,तपन सेन,ए विजय राघवन व केंद्रीय कमेटी सदस्य विक्रम सिंह ने संबोधित किया।सम्मेलन में दो स्थाई आमंत्रित सदस्यों सहित बत्तीस सदस्यीय राज्य कमेटी का गठन किया गया।संजय चौहान को राज्य सचिव चुना गया। डा.ओंकार शाद,राकेश सिंघा,डा.कश्मीर ठाकुर,डा.कुलदीप सिंह तंवर,प्रेम गौतम,कुशाल भारद्वाज,विजेंद्र मेहरा,भूपेंद्र सिंह को राज्य सचिवमंडल सदस्य चुना गया।रविंद्र कुमार, जगत राम,फालमा चौहान,होत्तम सौंखला,सुदेश,जोगिंद्र, देवकीनंद,नारायण,अशोक कटोच,राजेंद्र,मोहित,नरेंद्र, सत्यवान पुंडीर,महेंद्र राणा,राम सिंह,बरकत,कूलदीप डोगरा, वीना वैद्य,गीता राम,शकीनी कपूर और चंद्रकांता को राज्य कमेटी सदस्य चुना गया।सुरेश सरवाल और केके राणा,राज्य कमेटी में स्थाई आमंत्रित सदस्य होंगे।तीन सदस्यीय कंट्रोल कमीशन का गठन किया गया।जिसमें जगमोहन ठाकुर को अध्यक्ष,राजेंद्र चौहान और विजय शर्मा को सदस्य चुना गया। नवनिर्वाचित राज्य सचिव संजय चौहान ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भविष्य में पार्टी जनमुद्दों पर जनांदोलन करेगी।पार्टी प्रदेश में जनता को कांग्रेस भाजपा के अंदर एक बेहतर विकल्प देगी।पार्टी प्रदेश में मजदूरों,किसानों,मध्यम वर्ग,महिलाओं,छात्रों,युवाओं,दलितों, पिछड़ों,वंचितों,अल्पसंख्यकों व सभी मेहनतकश तबकों की आवाज बनेगी।उन्होंने कहा कि मोदी के नेतृत्व में चलने वाली एनडीए की केंद्र सरकार और हिमाचल की कांग्रेस सरकार दोनों ही जनविरोधी नीतियां लागू कर रही हैं,जिस से एक ओर अमीर और ज्यादा अमीर हो रहे हैं व आम जनता की पीड़ा लगातार बढ़ रही है।प्रदेश में युवाओं की रोजगार परीक्षाओं के नतीजे घोषित नहीं किए जा रहे हैं।आरोप लगाया कि शिमला में सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाडऩे के कार्य को आरएसएस व भाजपा से संबंधित कुछ सनातनी संगठनों ने अमलीजामा पहनाया परंतु इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस पार्टी के नेता भी बेनकाब हुए हैं।इस घटनाक्रम से इन दोनों पार्टियों का जनता में पर्दाफाश हुआ है व जनता के समक्ष केवल सीपीआईएम ही अब एकमात्र विकल्प है।
