वैसे तो किसी भी मौसम में बुख़ार का होना आम बात है,लेकिन बरसात के मौसम में यदि किसी व्यक्ति को तेज़ बुख़ार हो तो इसका एक कारण स्क्रब टाईफ़स भी हो सकता है,जिसमें मरीज़ को तेज़ बुखार जो कि 104 से 105 डिग्री तक हो सकता है।स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि स्क्रब टाईफस एक मौसमी जूनोटिक (पशु जन्य रोग) बीमारी है,आमतौर पर बरसात के मौसम में तेज़ बुख़ार के रोगियों की संख्या बढ़ जाती है,जिसके अधिकांश मामले बरसात के मौसम में होते हैं,जो घास काटने और सेब के मौसम के साथ मेल खाता है यह रोग एक जीवाणु विशेष (रिकेट्सिया) से संक्रमित पिस्सू (माईट) के काटने से फैलता है,यह जीवाणु चमड़ी के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है और स्क्रब टाईफ़स बुख़ार पैदा करता है,यदि जोड़ों में दर्द व कंपकंपी के साथ बुखार महसूस हो रहा है या शरीर में ऐंठन,अकड़न या शरीर टूटा हुआ सा रहा हो,अधिक संक्रमण के कारण गर्दन,बाजू के नीचे और कूल्हों के ऊपर गिल्टियाँ हो गई हैं,तो तुरंत अपने नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाँच करवाएं।स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता ने आम जन मानस से आग्रह किया है कि खेतों व झाड़ियों में काम करते समय पूरा शरीर खासकर टांगे,पांव व बाजू ढक कर रखें,शरीर की सफाई का विशेष ध्यान रखें,घर और आसपास के वातावरण को साफ रखें,घर के चारों तरफ घास खरपतवार न उगने दें,घर के अंदर व आसपास कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें, पालतू जानवरों की साफ-सफाई का नियमित रूप से ध्यान रखें,ध्यान देने योग्य बात है कि यह रोग एक एक आदमी से दूसरे को नहीं फैलता है,स्क्रब टाईफस का इलाज संभव है, बुख़ार कैसा भी हो डॉक्टरी परामर्श के बगैर किसी भी दवा का सेवन ना करें।राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक सुदेश मोक्टा ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में अब तक 5218 टेस्ट किये गए हैं,जिनमें 723 व्यक्ति पॉजिटिव पाए गए और 5 व्यक्तियों की मृत्यु हुई,जो बहुत ही दुर्भाग्य पूर्ण है,वर्तमान परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों व वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षकों को दवाइयों के समुचित भंडारण को सुनिश्चित करने के लिए कहा है,स्क्रब टायफस की रोकथाम व उपचार के लिए उपयुक्त प्रबंधन के साथ सूचना,शिक्षा एवं संप्रेषण गतिविधियों को व्यापक रूप से संचालित करने के लिए भी कहा गया है।

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