शिमला ग्रामीण से झूले पर सतलुज नदी को पार करके मगाण पहुंचे विधायक दीपराज।

हिमाचल में आज भी एक ऐसा गांव है जहां जान जोखिम में डाल झूले पर बैठकर लोग गंतव्य तक पहुंचते हैं।मगाण नामक यह गांव करसोग विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत सरत्योला में बसा है।विडंबना यह है कि राजनेताओं ने इस क्षेत्र को केवल वोट बैंक के तौर पर ही इस्तेमाल किया,लेकिन आज स्थानीय जनता में आशा की किरण उस वक्त जगी जब करसोग के तेजतर्रार एवं युवा विधायक दीपराज भन्थल उनके बीच पहुंचे।

विधायक को देखकर स्थानीय लोग प्रसन्न होने के साथ भावुक भी हुए उनका कहना था कि आज दशकों बाद कोई विधायक हमारे दर्द समझने मगाण पहुंचे हैं।विधायक दीपराज भन्थल ने विधानसभा चुनाव जीतने के बाद जनता का धन्यवाद करने हेतु सरत्योला पंचायत के अति दुर्गम गांव मगाण का दौरा किया।ऐसे में विधायक ने शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से जुड़ने वाले मांजू-मगाण झूले पर बैठकर सतलुज नदी को पार किया।

उसके बाद वह तेज धूप में पैदल सफर तय कर सरत्योला पंचायत के मगाण गांव पहुंचे।गांव पहुंचने पर उन्होंने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि यह दुख और शर्म की बात है कि आज अधिकतर गांव नई टैक्नोलॉजी एवं आधुनिक सुविधाओं से लैस हो रहे हैं लेकिन हमारा मगाण गांव मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित है।विधायक दीपराज ने स्थानीय जनता की समस्याओं का समाधान करने के उद्देश्य से मगाण गांव को गोद लेने की घोषणा की।उन्होंने कहा कि इस गांव को मैं आदर्श एवं विकासशील बनाने के लिए हरसंभव कार्य करूंगा।यहां की जनता को किसी भी प्रकार की समस्या झेलने नहीं दूंगा।इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मांजू-मगाण झूले को पुल में तबदील करने वाले मुद्दे को उन्होंने विधानसभा बजट सत्र में भी प्रमुखता से रखा था।उन्होंने चेताते हुए कहा कि यदि शीघ्र इस पुल का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया तो वह करसोग की जनता के साथ राज्य सरकार के खिलाफ अनशन शुरू करेंगे।

“56 साल बाद किसी विधायक ने किया मगाण गांव का दौरा”
करसोग विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत सरत्योला पंचायत के पिछड़े गांव मगाण का दौरा करना कोई भी राजनेता पसंद नहीं करता।यह बात मगाण गांव के लोगों ने खुलकर बताई है।मगाण के बुजुर्गों ने बताया कि वर्ष 1962 में पूर्व मुख्यमंत्री स्व.वीरभद्र सिंह ने इस गांव का दौरा किया था।उसके बाद वर्ष 1967 में करसोग के पूर्व विधायक स्व.मनसा राम ने मगाण का दौरा किया।लगभग 56 वर्ष बीतने पर आज पहली बार विधायक बने दीपराज भन्थल ने मगाण गांव का दौरा किया।ऐसे में स्थानीय जनता ने एमएलए दीपराज का स्वागत-अभिनंदन किया और बुजुर्गों ने उन्हें आशीर्वाद भी दिया।

विधायक दीपराज भन्थल ने मगाण गांव में स्थानीय लोगों के बीच बैठकर उनकी समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और जल्द समाधान निकालने का आश्वासन भी दिया।विधायक ने घोषणा करते हुए कहा कि सरत्योला पंचायत में बिजली की समस्या को दूर करने हेतु मगाण में ट्रांसफार्मर स्थापित करने के लिए यथाशीघ्र प्रयास किए जाएंगे। इसके साथ ही क्षेत्र को उचित पेयजल आपूर्ति करवाने के लिए पौने इंच की पाइपों को बिछाया जाएगा।विशेष रूप से सरत्योला-मगाण सड़क के कार्य के लिए विधायक निधि से उचित राशि प्रदान की जाएगी।वहीं मगाण में सामुदायिक भवन के निर्माण के लिए भी धनराशि दी जाएगी।विधायक ने कहा यह सभी कार्य आगामी 6 माह में पूर्ण करने के प्रयास किए जाएंगे।विधायक दीपराज ने कहा कि मगाण की वेदना से सभी परिचित होने चाहिए।इसी दृष्टि से विभागों के आला अधिकारियों को भी यहां का दौरा जरूर करना चाहिए।विधायक ने तीखे शब्दों में कहा कि यदि कोई अधिकारी मगाण के कार्यों में लापरवाही बरतता है तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।निश्चित तौर पर अधिकारियों को झूले पर बिठाकर सतलुज को पार करवाया जाएगा और उन्हें गांव में पैदल पहुंचाया जाएगा ताकि उन्हें यहां स्थिति की जानकारी जमीनी स्तर पर हो।

“पुल होता तो आज मेरे पति जिंदा होते”
विधायक दीपराज मगाण गांव में उस वक्त काफी भावुक हो गए जब उन्होंने एक माता की समस्या को जानने का प्रयास किया।महिला ने नम आंखों से कहा कि बेटा मांजू-मगाण पुल का निर्माण जरूर करना ताकि मेरी तरह दर्द किसी दूसरी बहन को न झेलने पड़े।उन्होंने बताया कि गत दो वर्ष पहले उनके पति का निधन हो गया।मगाण में स्वास्थ्य सुविधा का अभाव और मांजू-मगाण में पुल का निर्माण न होने के कारण उनके पति को अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका।इसके चलते उनकी दुखद मृत्यु हो गई।उस महिला के आंसू पोंछते हुए विधायक दीपराज ने कहा कि ईश्वर उन्हें अपने करीब स्थान दें और मैं वायदा करता हूं मांजू-मगाण पुल के निर्माण के लिए प्रमुखता से काम करूंगा।

“अंकल मुझे झूले में बैठकर डर लगता है”
मांजू-मगाण पुल से रोजाना स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर सतलुज नदी को पार करते हैं।वीरवार को भी एक नन्हीं बच्ची यहां झूले से सतलुज नदी को पार करने पहुंची थी।ऐसे में जब उस बच्ची से बातचीत की गई तो उस मासूम ने जवाब दिया कि अंकल इस झूले में बैठकर मुझे बहुत डर लगता है।यह सुनकर हर कोई खामोश था।यह एक मासूम थी लेकिन इस झूले में बैठकर सभी का दिल घबरा जाता है।ऐसा इसलिए क्योंकि झूले से नीचे देखा जाए तो मानों मौत साफ नजर आ रही हो।बता दें कि पूर्व जयराम सरकार ने मगाण में स्कूल खोलने की पहल की थी लेकिन वर्तमान कांग्रेस सरकार ने उस स्कूल को डिनोटिफाई कर दिया।गांव में 8 किलोमीटर के दायरे में कहीं भी स्कूल स्थापित नहीं है।यदि मगाण में स्कूल खुला होता तो बच्चों को जान जोखिम में डालने की आवश्यकता नहीं होती।फिलवक्त विधायक दीपराज ने इस गांव की समस्या को दूर करने का बीड़ा उठाया है।लोगों को उम्मीद है कि क्षेत्र का यह युवा विधायक अवश्यक समृद्धि की किरण मगाण तक पहुंचाएगा।
