सरकारी पत्र ने उठाए गंभीर सवाल,सत्य एक वर्ष तक क्यों छिपाया गया?जवाबदेही तय हो:सुधीर शर्मा।

भाजपा नेता एवं विधायक सुधीर शर्मा ने एक सरकारी दस्तावेज़ का हवाला देते हुए प्रदेश सरकार से कई गंभीर सवाल पूछे हैं।उन्होंने कहा कि यह केवल एक पत्र नहीं,बल्कि सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाने वाला दस्तावेज़ है।सुधीर शर्मा ने कहा कि 17 अक्टूबर 2025 को कार्मिक विभाग,हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी प्रबोध सक्सेना के संबंध में भारत सरकार द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम,1988 तथा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 197 के तहत अभियोजन स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है।पत्र में यह भी उल्लेख है कि सीबीआई जांच पूरी कर चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर चुकी है तथा मामला न्यायालय में विचाराधीन है।उन्होंने कहा कि इसी पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि यदि किसी अधिकारी के विरुद्ध विजिलेंस मामला लंबित हो,चार्जशीट दायर हो चुकी हो अथवा अभियोजन स्वीकृति प्रदान की जा चुकी हो,तो ऐसे अधिकारी को (विजिलेंस क्लियरेंस)जारी नहीं किया जा सकता।पत्र के अंतिम भाग में साफ शब्दों में लिखा गया है कि “Integrity cannot be certified.”सुधीर शर्मा ने कहा कि जब सरकार स्वयं अपने आधिकारिक पत्र में लिख रही थी कि संबंधित अधिकारी की इंटीग्रिटी प्रमाणित नहीं की जा सकती,तब सबसे बड़ा सवाल यह है कि फिर ऐसे अधिकारी को सेवा विस्तार क्यों दिया गया?उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी की सत्यनिष्ठा पर स्वयं सरकार के रिकॉर्ड में प्रश्नचिह्न मौजूद था तो उस तथ्य को लगभग एक वर्ष तक जनता,न्यायालय और पूरे प्रशासनिक तंत्र से क्यों छिपाया गया?आखिर इस तथ्य को छिपाने से किसे लाभ पहुंचाया गया?सुधीर शर्मा ने कहा कि यह मामला केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं है।प्रदेश सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या ऐसे अन्य अधिकारी भी हैं जिनके विरुद्ध गंभीर मामले लंबित होने के बावजूद उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां या सेवा विस्तार दिया गया है।उन्होंने कहा कि प्रदेश पहले से आर्थिक संकट से गुजर रहा है।ऐसे में जिन अधिकारियों की सत्यनिष्ठा पर स्वयं सरकारी रिकॉर्ड सवाल उठा रहे हों,उन्हें सेवा विस्तार देकर प्रदेश के खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालने की क्या मजबूरी थी?सरकार को यह भी बताना चाहिए कि ऐसे कौन से असाधारण कारण थे जिनकी वजह से नियमों और स्थापित प्रक्रियाओं की अनदेखी की गई।भाजपा नेता ने कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक निर्णय का नहीं बल्कि पारदर्शिता,जवाबदेही और सुशासन का है।लोकतंत्र में सरकारें तथ्यों को छिपाकर नहीं चल सकतीं।यदि सरकारी रिकॉर्ड में कोई तथ्य दर्ज है,तो उसे जनता और न्यायालय से छिपाना अत्यंत गंभीर विषय है।सुधीर शर्मा ने प्रदेश सरकार से मांग की कि पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराई जाए,सेवा विस्तार देने की परिस्थितियों को सार्वजनिक किया जाए तथा जिन अधिकारियों और निर्णयकर्ताओं की भूमिका रही है,उनकी जवाबदेही तय की जाए।उन्होंने कहा,लोकतंत्र में सच को दबाया नहीं जा सकता।सरकार को जनता के सामने हर प्रश्न का तथ्यात्मक उत्तर देना ही होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *