केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने शिमला में आयोजित विस्तृत प्रेस वार्ता में बजट 2026,भारत की अर्थव्यवस्था,हालिया अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों और हिमाचल प्रदेश से जुड़े वित्तीय मुद्दों पर विस्तार से बात करते हुए कहा कि भारत आज मजबूत आर्थिक आधार पर खड़ा है और आने वाले वर्षों मेंटेक्सटाइल,हैंडीक्राफ्ट,इलेक्ट्रॉनिक्स,मोबाइल,कंज्यूमर गुड्स और कृषि उत्पादों के लिए यूरोप व अमेरिका के बाजारों में सुनहरे अवसर खुलने वाले हैं।उन्होंने कहा कि हालिया व्यापार समझौतों को वैश्विक स्तर पर “मदर ऑफ ऑल डील्स”कहा गया है।केंद्रीय मंत्री ने विशेष रूप से आरडीजी (Revenue Deficit Grant)के मुद्दे पर स्पष्ट करते हुए कहा कि यह व्यवस्था मूल रूप से अस्थायी राहत के रूप में शुरू की गई थी,ताकि गंभीर वित्तीय घाटे से जूझ रहे राज्यों को सीमित समय के लिए सहारा मिल सके,12वें वित्त आयोग से शुरू यह प्रावधान बार-बार चेतावनियों के साथ आगे बढ़ाया गया,लेकिन इसे स्थायी व्यवस्था कभी नहीं माना गया,15वें वित्त आयोग के दौरान कोविड जैसी असाधारण परिस्थिति में राज्यों को फ्रंट-लोडेड और रिकॉर्ड स्तर की सहायता दी गई।उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश को भी इस अवधि में पहले की सभी अवधियों की तुलना में कहीं अधिक आरडीजी सहायता मिली।उन्होंने कहा कि अब वित्त आयोग ने स्पष्ट किया है कि निरंतर अनुदान के बजाय राज्यों को राजस्व बढ़ाने और व्यय अनुशासन अपनाने की दिशा में बढ़ना होगा।

शेखावत ने कहा कि वित्तीय घाटा (फिस्कल डेफिसिट)आय और व्यय के अंतर का विषय है और इसे केवल राजनीतिक बयानबाजी से नहीं,बल्कि संरचनात्मक सुधारों से ठीक किया जा सकता है।उन्होंने चिंता जताई कि हिमाचल का कर्ज-जीडीपी अनुपात 40% से ऊपर पहुंचना सावधानी का संकेत है और राज्य को दीर्घकालिक वित्तीय अनुशासन की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने वित्त आयोग के नए फॉर्मूले के तहत कर हिस्सेदारी में संरचनात्मक वृद्धि की है,जिससे हिमाचल जैसे राज्यों को अधिक हिस्सा मिल रहा है और इससे आरडीजी घटने के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित किया जा सकता है,बशर्ते राज्य वित्तीय प्रबंधन मजबूत करें। हिमाचल के संदर्भ में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पर्यटन और सांस्कृतिक विकास के लिए लगातार सहयोग दिया है।हाल ही में विशेष पूंजीगत सहायता योजना के तहत हिमाचल को पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए 50 वर्ष अवधि का ब्याज-मुक्त दीर्घकालिक ऋण स्वीकृत किया गया है,जो व्यवहारिक रूप से अनुदान जैसा है।स्वदेश दर्शन,प्रसाद, चैलेंज बेस्ड डेस्टिनेशन और अन्य योजनाओं के तहत भी प्रदेश को निरंतर सहायता मिली है और आगे भी परियोजना प्रस्ताव मिलने पर सहयोग जारी रहेगा।प्राकृतिक आपदाओं के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने एसडीआरएफ और एनडीआरएफ फंड में पिछले वर्षों में कई गुना वृद्धि की है और राज्यों को न केवल राहत बल्कि प्रिवेंटिव उपायों पर भी खर्च की अनुमति दी गई है।उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि जलवायु परिवर्तन के दौर में आपदा-पूर्व तैयारी पर अधिक निवेश किया जाए।भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और कृषि पर उठ रहे सवालों पर शेखावत ने कहा कि किसानों,डेयरी,दाल,अनाज,सब्ज़ी और मसाला उत्पादकों के हित पूरी तरह सुरक्षित रखे गए हैं।गेहूं,चावल, दालें,सामान्य सब्ज़ियां,डेयरी उत्पाद,मसाले और अधिकांश फल श्रेणियों पर कोई बाज़ार खुलापन नहीं दिया गया है।उन्होंने कहा कि सेब के मुद्दे पर कांग्रेस अनावश्यक राजनीति कर रही है।बाहर से आने वाला सेब 100 से कम लैंडिंग कीमत पर भारत नहीं आ सकता लगभग 80 रुपए न्यूनतम बेस प्राइस और उस पर 20 से 40 तक टैक्स जुड़ने के बाद ही आयात संभव है इसलिए स्थानीय बागवानों के हित सुरक्षित हैं।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बजट 2026,हालिया व्यापार समझौते,इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और मैन्युफैक्चरिंग थ्रस्ट मिलकर भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएंगे और हिमाचल प्रदेश भी इससे बड़े पैमाने पर लाभान्वित होगा।

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