
शिक्षा विभाग की लचर व्यवस्था से शिमला ग्रामीण के पाहल गांव के बच्चे और उनके अभिभावक खासे परेशान हैं।वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पाहल में दो साल से केमिस्ट्री का प्राध्यापक नहीं है जिससे बच्चे साइंस विषय छोड़ आर्ट्स पढ़ने को मजबूर है।एसएमसी अध्यक्ष अनुराधा शर्मा ने बताया कि वे दो साल से खाली पड़ी पोस्ट पर नियुक्ति के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।प्राध्यापक की विलिंग्नेस के बावजूद भी पोस्टिंग नहीं की गई।हर्ष का विषय है,केतन कला केंद्र अपनी स्थापना के 25 साल पूरे करने जा रहा है।शास्त्रीय,सुगम,लोक संगीत के संरक्षण,प्रोत्साहन व प्रशिक्षण को लेकर यह केंद्र लगातार काम कर रहा है,इसके लिए राज्यपाल हिमाचल प्रदेश ने केतन कला केंद्र को पुरस्कृत भी किया है।

उधर स्कूल में खाली पड़े शिक्षक के पद को लेकर उन्होंने शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर के समक्ष अपनी समस्या को रखा लेकिन मंत्री महोदय ने भी उन्हें समाधान नहीं परामर्श दिया कि बच्चों को टूटू वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में भेजें।अनुराधा शर्मा ने बताया कि ऐसे में पाहल और कोटला पंचायत के दूर दराज के गांव नहेवट,टपरोग,बमोत,शिलडू,बझोल के बच्चों को रोजाना 40-50 किमी का सफर तय करना पड़ेगा जिससे पढ़ाई के लिये समय नहीं बचेगा,उन्होंने बताया कि बच्चों का भविष्य अधर में लटका है,उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र के स्कूल के साथ भेदभाव का आरोप लगाया,कहा कि शिमला शहरी क्षेत्र के कई स्कूलों में एक ही विषय के तीन से अधिक प्राध्यापक है।उन्होंने सरकार से जल्द केमिस्ट्री के प्राध्यापक की न्युक्ति की मांग की है।वहीं उच्च शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि रिक्त पद को भरने का मामला सरकार के ध्यान में है।स्कूल प्रबंधन समिति की ओर से यदि उन्हें कोई लिखित मांगपत्र आता है तो वह विभाग को भेजेंगे ताकि समस्या का स्थाई समाधान हो सके।

