भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राजनैतिक विषयों की कैबिनेट समिति ने यह निर्णय लिया है कि जातियों की गणना को आने वाली जनगणना में सम्मिलित किया जाए।यह इस बात को दर्शाता है कि वर्तमान सरकार देश और समाज के सर्वांगिक हितों और मूल्यों के लिए प्रतिबद्ध है।उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकारों ने आज तक जाति जनगणना का विरोध किया है।आजादी के बाद की गई सभी जनगणनाओं में जातियों की गणना नहीं की गई।आजादी के बाद यह पहली बार है कि प्रॉपर सही तरीके से जनगणना के साथ जाति जनगणना कराई जा रही है।बिंदल ने कहा कि वर्ष 2010 में,तत्कालीन प्रधानमंत्री दिवंगत डॉ.मनमोहन सिंह ने लोकसभा में आश्वासन दिया था कि जाति जनगणना पर कैबिनेट में विचार किया जाएगा।तत्पश्चात एक मंत्रिमण्डल समूह का भी गठन किया गया था,जिसमें अधिकांश राजनैतिक दलों ने जाति आधारित जनगणना की संस्तुति की।इस समूह में शामिल केंद्रीय गृह मंत्री पी.चिदंबरम ने 2011 की जनगणना में जाति को शामिल करने का विरोध किया और कहा कि जातियों की गिनती जनगणना में नहीं, बल्कि अलग से कराई जाएगी।इसके बावजूद कांग्रेस की सरकार ने जाति जनगणना के बजाए एक सर्वे कराना ही उचित समझा।इस पर 4893.60 करोड़ रुपये ख़र्च किए गए लेकिन जातिगत आँकड़े प्रकाशित नहीं हुए क्योंकि इसमें 8.19 करोड़ गलतियां पाई गई।28 जुलाई 2015 को सरकार ने इसके बारे में बताया था।इस सब के बावजूद, कांग्रेस और इंडी गठबंधन के दलों ने जाति जनगणना के विषय को केवल अपने राजनैतिक लाभ के लिए उपयोग किया।

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