
Shimla के एपीजी विश्वविद्यालय ने शिक्षक दिवस के साथ साथ विश्वविद्यालय का 11 वां स्थापना दिवस विश्वविद्यालय के सभागार में धूमधाम से मनाया।पाँच सितंबर 2012 में शिक्षक दिवस के अवसर इस विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी।एपीजी शिमला विश्वविद्यालय स्थापना दिवस के साथ शिक्षक दिवस गरिमापूर्ण तरीके से आयोजित किया गया जिसमें विद्यार्थियों और शिक्षकों ने बढ़चढ़कर भाग लिया। सुबह से ही एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के कैंपस में अपने चेहते शिक्षकों को बधाई संदेश व उपहार भेंट करने का तांता लगा रहा।शिक्षकों और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से भी इस पावन अवसर पर विद्यार्थिवर्ग के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और शुभकामनाएं दीं।एपीजी शिमला विश्वविद्यालय स्थापना दिवस और शिक्षक दिवस कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ.अनिल कुमार पॉल ने की जबकि इस अवसर पर एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के चांसलर इंजीनियर सुमन विक्रांत ने बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम में शिरकत की,प्रो-चांसलर व पूर्व वाईस-चांसलर प्रो.डॉ.रमेश चौहान कार्यक्रम में वशिष्ठ अतिथि के रूप में मौजूद रहे।कार्यक्रम में उपस्थित होने से पहले विश्वविद्यालय के एनसीसी कैडेट्स ने मुख्य अतिथि व वशिष्ठ अतिथि को गार्ड ऑफ ऑनर दिया।मुख्य अतिथि चांसलर इंजीनियर सुमन विक्रांत और वशिष्ठ अतिथि प्रो.रमेश चौहान ने शिक्षकों को बेहतर शिक्षा प्रदान करने के लिए सम्मानित किया।एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के 11वें स्थापना दिवस और शिक्षक दिवस की बधाई देते हुए,चांसलर इंजीनियर सुमन विक्रांत ने कहा कि एपीजी शिमला विश्वविद्यालय ने कई चुनौतियों का सामना करते हुए शैक्षिक विकास की इस छोटी-सी यात्रा के दौरान प्रोफेशनल व टेकनिकल शिक्षा के क्षेत्र में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं,आज एपीजी शिमला विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश सहित देश और विदेशों में गुणात्मक शिक्षा के जरिये अपनी पहचान बना चुका है।चांसलर सुमन विक्रांत ने विद्यार्थियों,शिक्षकों और कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने ज्ञान,विज्ञान,कला और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाया है।उन्होंने कहा कि इस परंपरा को और सुदृढ़ करने के प्रयास जारी हैं।उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की स्थापना और संचालन में पूरे समाज का योगदान होता है।विश्वविद्यालयों को भी समग्र रूप से समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।चांसलर सुमन विक्रांत ने कहा कि शिक्षण संस्थानों को सामाजिक उत्तरदायित्व के लिए सक्रिय होना चाहिए।समाज के गरीब लोगों,गांवों और उपेक्षित लोगों की प्रगति में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर उन्हें हर तरह से जागरूक करना चाहिए चांसलर इंजीनियर सुमन विक्रांत ने कहा कि ज्ञान इस सदी के विश्व बाजार में सबसे महत्वपूर्ण पूंजी के रूप में उभरा है और ज्ञान,बुद्धि व कौशल के क्षेत्र में भी निरंतर परिवर्तन हो रहे हैं।उन्होंने कहा कि नए नवाचार के परिणामस्वरूप,अपने ज्ञान और कौशल को लगातार प्रासंगिक बनाए रखना एक चुनौती व अवसर दोनों हैं।वहीं कार्यक्रम में वशिष्ठ प्रो-चांसलर प्रो.डॉ.रमेश चौहान ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए एपीजी शिमला विश्वविद्यालय की विकास यात्र व स्थापना बारे अपने विचार साझा किए।प्रो-चांसलर प्रो.रमेश चौहान ने कहा कि एक व्यक्ति जो हमेशा नया जानने और सीखने का प्रयास करता है,वह इस चरण की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होगा।ऐसे व्यक्ति जो हमेशा जिज्ञासा, उत्साह और सतर्कता के साथ अपने ज्ञान,कौशल और बुद्धिमत्ता का विकास करता है,उनके लिए आज अपार अवसर हैं।एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के 11 वें स्थापना दिवस पर प्रो-चांसलर प्रो.रमेश चौहान ने एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के संस्थापकों,ट्रस्ट के उन लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया,जिनके दृष्टिकोण से एपीजी शिमला विश्वविद्यालय की स्थापना हुई।प्रो.रमेश चौहान ने कहा कि स्थापना दिवस हमें संस्था के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने,इसके मूल्यों और साझा उद्देश्य की रक्षा करने और दूसरों के लिए अवसर पैदा करने की सामूहिक जिम्मेदारी देता है,खासकर उन लोगों के लिए जिनके पास योग्यता तो है लेकिन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में भाग लेने के साधन नहीं हैं। प्रो.चौहान ने कहा कि एपीजी शिमला विश्वविद्यालय द्वारा विद्यार्थियों को गुणात्मक शिक्षा प्रदान की जा रही और शिक्षा को रोजगार सृजन से जोड़ा जा रहा और इस दिशा में विश्वविद्यालय के शिक्षक कड़ी मेहनत कर रहे हैं और विद्यार्थियों को व्यवहारिक ज्ञान की सीख दी जा रही है।प्रो.चौहान ने कहा कि विश्वविद्यालय में बेहतर पढ़ाई का माहौल बनाने के लिए सुरम्य वातावरण में बेहतर शिक्षा प्रदान की जा रही है और बेहतर विश्वविद्यालय इंफ्रास्ट्रक्चर में सुविधाओं की कोई कमी नहीं है।प्रो.रमेश चौहान ने एपीजी शिमला विश्वविद्यालय प्रशासन को नए व्यवसाय पाठ्यक्रम व स्कूल ऑफ अलाइड एंड हेल्थ केयर साइंसेज और स्कूल ऑफ फार्मेसी शुरू करने के लिए बधाई दी और प्रसन्नता व्यक्त कि विद्यार्थिवर्ग फार्मेसी व पैरामेडिकल में अपना भविष्य बना सकते हैं।प्रो.रमेश चौहान ने कहा कि विश्वविद्यालय को अनुसंधान का केंद्र बनाने का प्रयास किया जा रहा और जहां शिक्षा का आधार चरित्र निर्माण सबसे पहली शर्त है।लेकिन अब हमें उच्च शिक्षा के साथ-साथ अनुसंधान गतिविधियों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।सुबह से लेकर शाम तक एपीजी शिमला विश्वविद्यालय स्थापना व शिक्षक दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय सभागार और कैंपस में विद्यार्थियों की धूम रही और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किए।कार्यक्रम का समापन एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के डीन एकेडेमिक्स प्रो.डॉ. आनंद मोहन शर्मा के वोट ऑफ थैंक्स से हुआ।प्रो.आनंद मोहन शर्मा ने एपीजी शिमला विश्वविद्यालय स्थापना दिवस और शिक्षक दिवस के अवसर पर सभी विद्यार्थियों,शिक्षकों, गैर-शिक्षकों और विश्वविद्यालय प्रशासन को बधाई दी और कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए धन्यवाद किया।इस अवसर पर एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों व विभागों के डीन व विभागाध्यक्ष स्कूल ऑफ साइंसेज की डीन प्रो.डॉ.रोहिणी धरेला,स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग व कंप्यूटर इंजिनीरिंग के विभागाध्यक्ष प्रो.डॉ. अंकित ठाकुर,डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ.नीलम शर्मा,स्कूल ऑफ मैनेजमेंट व कॉमर्स की विभागाध्यक्ष डॉ.मोनिका बालटू, स्कूल ऑफ होटल मैनेजमेंट व हॉस्पिटैलिटी की विभागाध्यक्ष आचार्य सुमन लता राही, स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज व रिसर्च की विभागाध्यक्ष डॉ.भावना शर्मा,स्कूल ऑफ अलाइड एंड हेल्थ केयर साइंसेज की विभागाध्यक्ष डॉ. प्राची वैद और जनसंचार व पत्रकारिता के विभागाध्यक्ष और सभी विभागों के आचार्य उपस्थित रहे।
