मोदी सरकार पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के साथ खड़ी है:बिंदल।

Shimla:भारतीय जनता पार्टी प्रदेश अध्यक्ष डाॅ राजीव बिन्दल ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने पिछले 9 वर्षों में गरीब कल्याण के लिए काम किया जिसका परिणाम है कि करोड़ों-करोड़ों लोग गरीबी रेखा को पार कर लोअर मिडल क्लास में प्रवेश किए हैं।43 करोड़ गरीबों के जनधन खाते खुलवाए,50 करोड़ गरीब लोगों को आयुष्मान भारत के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा का लाभ दिया,लगभग 20 करोड़ किसानो के खाते में पिछले तीन वर्षों से 6000 प्रतिवर्ष डालकर किसानो को सम्मान दिया।करोड़ों गरीबों को घर दिए,पीने का स्वच्छ पानी दिया और स्वरोजगार के साधन दिए।किसानों को 10 लाख करोड़ रू यूरिया की सबसिडी दी,10 करोड़ बहनों को स्वयं सहायता समूह से जोड़कर सहयोग पहुंचाया।इस प्रकार की अनेकों योजनाओं के माध्यम से गरीब कल्याण के 9 वर्ष रहे जिसमें भारत आर्थिक दृष्टि से,सामरिक दृष्टि से,राजनीतिक दृष्टि से मजबूत हुआ।
15 अगस्त,2023 को लाल किले की प्राचीर से नरेन्द्र मोदी ने देश को गारंटी दी कि 10 साल में भारत को 10वें स्थान से उठाकर 5वीं आर्थिक महाशक्ति बनाया है और अब अगले 5 साल में दुनिया की तीसरी आर्थिक महाशक्ति बनाऊंगा।इसके लिए मोदी ने देश के कारीगरों,हुनरमंदों को मजबूत करने का फैंसला लिया।कुम्हार,सुनार,चरमकार,बढ़ई,मिस्त्री,वाशरमैन, बार्बर,मूर्तिकार जितने प्रकार के कारीगर हैं उन सभी को मजबूत करने के लिए पहले चरण में भगवान विश्वकर्मा के नाम पर प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना शुरू की गई।13 हजार करोड़ रू पहले चरण में इसके लिए आबंटित कर दिये गये। यह योजना गरीब समाज के उत्थान के लिए बड़े साधन के रूप में बढ़ेगी।डिजीटल इंडिया पर पिछले 9 वर्षों से काम चल रहा है इसी कड़ी में 15 हजार करोड़ व्यय करके 6 लाख बेरोजगारों के हुनर को बढ़ाया जाएगा।अगले 5 साल मेें महिलाओं के स्वयं सहायता समूह को मजबूत करते हुए रोजगार के करोड़ों-करोड़ों अवसर तैयार किए जाएंगे।गरीब कल्याण की और किसानों के कल्याण की सभी योजनाओं को विस्तार दिया जाएगा।मोदी का लक्ष्य परिवारवाद,भ्रष्टाचार और तुष्टीकरण तीन बुराईयों को समाप्त करना है और डैमोग्राफी,डैमोक्रेसी,डाईवर्सिटी के माध्यम से देश के विकास को सुनिश्चित करना है।बिंदल ने कहा की केंद्र की मोदी सरकार पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के साथ खड़ी है,पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत शिल्पकारों के उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता बड़ेगी।छोटे कारीगरों को घरेलू व वैश्विक बाजार में जगह मिलेगी।इस योजना के अंतर्गत पहले चरण के 18 पारंपरिक व्यवसायों को शामिल किया जाएगा।
