पहले दिन छह नाट्य प्रस्तुतियों ने बच्चों की कल्पनाशीलता और रंगमंचीय प्रतिभा को दिया मंच।

बच्चों की कल्पनाशीलता,आत्मविश्वास और रचनात्मक अभिव्यक्ति को मंच देने की खूबसूरत यात्रा बाल रंगमंच महोत्सव के चौथे संस्करण के साथ आगे बढ़ी,7 से 9 अक्टूबर 2026 तक गॉथिक हॉल,गेयटी थिएटर,शिमला में आयोजित हो रहे इस महोत्सव का उद्देश्य बच्चों को रंगमंच के माध्यम से अपनी रचनात्मकता,विचारों और अभिव्यक्ति को सामने रखने का अवसर प्रदान करना है।लगातार चार वर्षों तक इस आयोजन को आगे बढ़ाने के पीछे टीम कीकली का रंगमंच और बच्चों के प्रति वही जुनून,विश्वास और समर्पण है।इस वर्ष महोत्सव में 16 इंस्टीट्यूट्स उत्साहपूर्वक अपनी प्रस्तुतियाँ देंगी,वहीं दो विशेष स्क्रीनिंग्स का आयोजन भी किया गया है।

महोत्सव की गरिमामयी उपस्थिति में सम्माननीय अतिथि दिव्या जगदाले,अभिनेत्रि और रंगकर्मी रहेंगी।प्रस्तुतियों का मूल्यांकन अनुभवी निर्णायक मंडली डॉ.पूर्णिमा चौहान,अनुराधा दर और आस्था शुक्ला चड्ढा करेंगे।इस यात्रा को दिशा देने में वरिष्ठ रंगमंच विशेषज्ञ श्रीयुत श्रीनिवास जोशी,जवाहर कौल और राजन कौशल तथा क्रिएटिव डायरेक्टर्स विवेक मोहन,रुपेश भीमटा,संजीव अरोरा,कुमार शानू और आदर्श चौहान का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

महोत्सव के पहले दिन बच्चों की ओर से छह नाट्य प्रस्तुतियाँ मंचित की गईं।दिन की शुरुआत सरस्वती पैराडाइस इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल की प्रस्तुति ‘उपहास’ से हुई,रणजोध सिंह दवारा लिखी गयी कहानी से।इसके बाद स्वर्ण पब्लिक स्कूल,टूटीकंडी ने मंजुला गुलाटी की कहानी ‘लिटल हैंड्स,बिग डिफरेंस’ प्रस्तुत की,रूट्स कंट्री स्कूल,बागी,ने ऋचा कश्यप की कहानी ‘बिशुरी जलेबी पकौड़े’ मंचित की,इसके बाद जी.एस.एस.एस.सरोग, ठियोग,ने श्रेया नेगी की कहानी ‘द सॉइल रिमेम्बर्स’ प्रस्तुत की।संभोटा तिब्बतन स्कूल,छोटा शिमला की प्रस्तुति ‘पिदू चिड़ू’ की कथा,ने प्रस्तुत्त की जो किशन श्रीमन ने लिखी थी।पहले दिन की प्रस्तुतियों का समापन सर्वोदय बाल आश्रम रूकवूड की टीम ने किआन अमरीक ठाकुर की कहानी ‘द कॉफी शॉप’ के साथ किया।छहों प्रस्तुतियों में बच्चों ने अभिनय,संवाद,कल्पनाशीलता और मंचीय अभिव्यक्ति के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

अलग-अलग विषयों और कथानकों पर आधारित इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों के सामने बच्चों की रचनात्मक सोच और रंगमंच के प्रति उनकी रुचि को सामने रखा।बाल रंगमंच महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं,बल्कि बच्चों की आवाज़,कल्पना और सपनों को मंच देने की एक निरंतर यात्रा है।चौथे वर्ष में भी इस सफर को जारी रखना टीम कीकली के लिए गर्व और प्रेरणा दोनों है।
