
संजौली-सिमिट्री क्षेत्र में निर्माणाधीन भूमिगत टनल के ऊपर स्थित मकानों में आई दरारों और नुकसान का अब वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा।जिला प्रशासन ने प्रभावित मकानों की पहचान,मरम्मत और गुणवत्ता जांच के लिए कार्ययोजना तैयार की है।दरारों के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए आईआईटी रुडक़ी के विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी।उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में सोमवार को हुई बैठक में तय किया गया कि राजस्व विभाग प्रभावित मकानों को चिन्हित करेगा।इसके बाद निर्माण कंपनी मरम्मत का रोडमैप तैयार कर काम करेगी।

मरम्मत पूरी होने पर लोक निर्माण विभाग गुणवत्ता और कार्य की पूर्णता का सत्यापन करेगा।प्रशासन ने टनल के ऊपर करीब 100 मीटर क्षेत्र में स्थित सभी मकानों का निरीक्षण कर उन्हें सूचीबद्ध करने का भी निर्णय लिया है।मकानों का आकलन चरणबद्ध तरीके से होगा।पहले 11-11 मीटर की दोनों टनल के ऊपर स्थित मकानों,फिर दोनों टनल के बीच 20 मीटर हिस्से और इसके बाद दोनों तरफ 30-30 मीटर क्षेत्र में आने वाले मकानों की जांच की जाएगी।एनएचएआई ने बैठक में बताया कि फिलहाल सुरंग निर्माण के लिए ब्लास्टिंग नहीं हो रही है।हालांकि,जिला प्रशासन ने निर्माण कंपनी को दी गई ब्लास्टिंग की अनुमति तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी है।प्रशासन ने इसे प्रभावित क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर एहतियाती कदम बताया है।

प्रशासन ने आईआईटी रुडक़ी से विशेषज्ञ दल भेजने का अनुरोध किया है।विशेषज्ञ प्रभावित मकानों का निरीक्षण कर दरारों के कारणों का तकनीकी आकलन करेंगे।साथ ही सुरंग निर्माण का आगामी काम सुरक्षित तरीके से करने के लिए आवश्यक सावधानियों और उपायों पर सुझाव देंगे।

