फसलों के विविधीकरण पर दिया बल
वन अधिकार अधिनियम के तहत 636 व्यक्तिगत और 20 सामुदायिक दावे स्वीकृत।

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने जनजातीय विकास तथा बागवानी विभागों की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण की दिशा में कार्य कर रही है।किसानों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आय बढ़ाने के लिए सरकार ने ठोस कदम उठाए है।प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार रसायन-मुक्त कृषि उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान कर रही है।उन्होंने कहा कि विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा किसानों को लाभान्वित करने के लिए प्रदेश सरकार बागवानी विभाग को हर संभव सहयोग प्रदान करेगी और विभाग में रिक्त पदों को भी भरा जाएगा।मुख्यमंत्री ने एचपी-शिवा परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि विभिन्न क्षेत्रों की भौगोलिक एवं जलवायु परिस्थितियों के अनुसार बागवानी में फलों की विभिन्न किस्मों के विविधीकरण की नितांत आवश्यकता है।बागवानी प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और विभाग को बागवानों को व्यापक तकनीकी सहायता उपलब्ध करवानी चाहिए,ताकि उनकी आय में वृद्धि सुनिश्चित हो सके।श्री सुक्खू ने जनजातीय विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं की भी समीक्षा की।उन्होंने इन योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी के निर्देश दिए ताकि जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को इसका लाभ मिल सके।उन्होंने कहा कि मार्च 2023 से मार्च 2026 के बीच वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत 636 व्यक्तिगत दावे तथा 20 सामुदायिक दावे स्वीकृत किए गए हैं।इन दावों के निपटारे के लिए 2259.24 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरित की गई है।मुख्यमंत्री ने निचार,पांगी,भरमौर और लाहौल स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के कार्यकलापों की भी समीक्षा की। उन्होंने इन विद्यालयों के विद्यार्थियों को सर्वाेत्तम सुविधाएं उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए।वर्तमान में इन विद्यालयों में 1013 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।बैठक में बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी,अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार शर्मा,सचिव सी.पालरासू तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
