जिला शिमला में स्कूलों के नजदीक दुकानदारों के लाइसेंस की समीक्षा की जाएगी।यह आदेश उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने तंबाकू नियंत्रण पर जिला स्तरीय समन्वय समिति की समीक्षा बैठक के दौरान दिए।उपायुक्त ने कहा कि स्कूलों के आसपास जिन भी दुकानों को लाइसेंस जारी किए गए हैं उन लाइसेंस होल्डर्स की समीक्षा की जाएगी।इसके अलावा भविष्य में किसी भी दुकानदार को लाइसेंस फिजिकल निरीक्षण रिपोर्ट के बाद ही जारी किया जाएगा।अगर लाइसेंस जारी करने वाले अधिकारियों ने बिना निरीक्षण रिपोर्ट के लाइसेंस जारी किया तो उक्त अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।उपायुक्त ने कहा कि स्कूल के प्राधानाचार्य को परिसर के 100 गज के दायरे में दुकानों को निरीक्षण करने का अधिकार है।अगर किसी दुकान में तंबाकू उत्पादों की ब्रिकी की जा रही है तो उसके खिलाफ कार्यवाही अमल में लाई जाए।स्कूल प्रधानाचार्य स्वयं दुकानों का औचक निरीक्षण भी करें।उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों के आसपास तम्बाकू उत्पादों की बिक्री पर विशेष प्रतिबंध लागू है।न्यायालय के निर्देशों के अनुसार किसी भी स्कूल,कॉलेज या अन्य शैक्षणिक संस्थान के 100 मीटर के दायरे में सिगरेट,बीड़ी अथवा किसी भी प्रकार के तम्बाकू उत्पाद की बिक्री पूर्णतः निषिद्ध है।उन्होंने कहा कि बसंतपुर ब्लॉक में स्कूलों के समीप दुकानदारों ने लिखित में प्रशासन को दिया है कि वे किसी भी प्रकार के तंबाकू उत्पाद की बिक्री नहीं करेंगे।यह नई पहल है जो सामुदायिक सहयोग की तरह संदेश देती है। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने जिला के सभी अस्पतालों में तंबाकू मुक्त अस्पताल परिसर बाॅक्स स्थापित किए है जिसमें मरीज और तीमारदार को अस्पताल में प्रवेश करने से पहले तंबाकू उत्पाद बॉक्स में डालने होते है।जिला भर में लोग इस पहल में सहयोग कर रहे है।स्वास्थ्य विभाग की ओर से एनएचएम द्वारा करवाए गए सर्वेक्षण के अधार पर शिमला के माॅल रोड़ का क्षेत्र लिया गया।दो घंटे सात मिनट तक चले इस सर्वेक्षण में 3.31 किलोमीटर क्षेत्र कवर किया।इसमें स्कूल के दायरे में आने वाली 17.5 फीसदी दुकानों में तंबाकू उत्पादों की बिक्री के लाईसेंस जारी किए है।उपायुक्त अनुपम कश्यप ने आम जनता,व्यापारियों तथा संस्थानों से अपील की है कि वे कोटपा अधिनियम के प्रावधानों का पूर्ण पालन करें और तंबाकू मुक्त एवं स्वस्थ समाज के निर्माण में अपना सहयोग दें।तंबाकू सेवन न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है,बल्कि यह कैंसर,हृदय रोग,फेफड़ों की बीमारियों सहित अनेक गंभीर रोगों का प्रमुख कारण भी है।अतिरिक्त उपायुक्त सचिन शर्मा,एडीएम लाॅ एंड आर्डर पंकज शर्मा,मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा यशपाल रांटा,जिला कार्यक्रम अधिकारी तंबाकू नियंत्रण प्रोग्राम डा राखी,सीएचओ डा अंजली चौहान,जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ विनीत लखनपाल,जिला कार्यक्रम अधिकारी ममता पाॅल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

कोटपा नियमों का सख्ती से पालन अनिवार्य:सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (सीओटीपीए)2003 भारत सरकार द्वारा तंबाकू नियंत्रण तथा जन स्वास्थ्य संरक्षण के उद्देश्य से लागू किया गया एक महत्वपूर्ण कानून है।हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा इस अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप वर्ष 2013 में प्रदेश को देश का पहला धूम्रपान मुक्त राज्य घोषित किया गया था।अधिनियम की धारा-4 के तहत सभी सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पूर्णतः प्रतिबंधित है।सरकारी कार्यालयों,अस्पतालों,शिक्षण संस्थानों,होटल,रेस्टोरेंट,बस अड्डों तथा अन्य सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करते पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति पर 200 रुपये तक का जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है।कोटपा अधिनियम की धारा-5 तंबाकू उत्पादों के प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष विज्ञापन,प्रचार तथा प्रायोजन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाती है।वहीं धारा-6(क) के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को तंबाकू उत्पाद बेचना या उनसे तंबाकू उत्पाद बिकवाना दंडनीय अपराध है।धारा-6(ख) के तहत किसी भी विद्यालय,महाविद्यालय अथवा अन्य शिक्षण संस्थान के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री पूर्णतः प्रतिबंधित है।इसके अतिरिक्त धारा-7 के अनुसार बिना निर्धारित सचित्र स्वास्थ्य चेतावनी वाले तंबाकू उत्पादों का निर्माण,वितरण अथवा विक्रय भी कानूनन प्रतिबंधित है।हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा तम्बाकू नियंत्रण को प्रभावी बनाने तथा युवाओं और बच्चों को तम्बाकू उत्पादों की आसान उपलब्धता से बचाने के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश खुली सिगरेट और बीड़ी बिक्री प्रतिषेध तथा सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद खुदरा कारोबार विनियमन अधिनियम,2016 लागू किया गया है।इस अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए वर्ष 2018 में संबंधित नियम भी अधिसूचित किए गए हैं।अधिनियम के अनुसार राज्य में किसी भी व्यक्ति द्वारा खुली अथवा एकल सिगरेट और बीड़ी की बिक्री पूर्णतःप्रतिबंधित है।कोई भी दुकानदार बिना पैकेट के सिगरेट या बीड़ी न तो बेच सकता है और न ही बिक्री के लिए प्रदर्शित कर सकता है।इस प्रावधान का उद्देश्य विशेष रूप से बच्चों एवं किशोरों को तम्बाकू उत्पादों तक आसान पहुंच से रोकना है।अधिनियम के उल्लंघन पर कठोर दंड का प्रावधान किया गया है।प्रथम बार नियमों का उल्लंघन करने पर दोषी व्यक्ति को तीन माह तक का कारावास अथवा 50 हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों दंड दिए जा सकते हैं।यदि कोई व्यक्ति दोबारा या बार-बार उल्लंघन करता पाया जाता है तो उसे एक वर्ष तक का कारावास तथा एक लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।साथ ही,अवैध रूप से बेचे जा रहे तम्बाकू उत्पादों एवं संबंधित सामग्री को जब्त करने का भी प्रावधान है।वर्ष 2018 में अधिसूचित नियमों के अंतर्गत पंजीकरण की प्रक्रिया,आवेदन प्रपत्र तथा आवश्यक दस्तावेजों का विस्तृत विवरण निर्धारित किया गया है।निर्धारित शुल्क एवं आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही व्यापारी को पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।

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