
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डाॅ.राजीव बिंदल ने आरोप लगाया है कि भाजपा का विरोध करते हुए कांग्रेस पार्टी देश,विकास व गांव तक का विरोध करने पर उतर आती है।ऐसा ही विरोध कांग्रेस पार्टी मनरेगा के नाम पर लाई गई वीबी-जी राम जी योजना का विरोध करते हुए कर रही है।उन्होंने कहा कि वीबी-जी राम जी योजना केंद्र सरकार के विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करेगी।इसकी 90 फीसदी फंडिंग केंद्र सरकार करेगी तथा शेष 10 फीसदी राशि राज्य सरकार को वहन करनी होगी।मनरेगा में जहां 100 दिन का रोजगार देने की बात कही गई थी,वहीं वीबी-जी राम जी योजना में 125 दिन का रोजगार सुनिश्चित है।डाॅ.राजीव बिंदल ने शिमला में पत्रकार वार्ता करते हुए कहा कि आजादी के बाद कांग्रेस की सरकार ने वर्ष 1960-61 में रुरल मैनपावर प्रोग्राम से लेकर वर्ष 2005 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) तक अनेक योजनाएं लागू कीं और उसके नाम बदले।यहां तक की कांग्रेस पार्टी ने नेहरू के नाम पर चल रही योजनाओं के नाम बदले,लेकिन उसका किसी ने विरोध नहीं किया।उन्होंने कहा कि मनरेगा में 100 दिन की रोजगार गारंटी थी,लेकिन वास्तविकता यह रही कि औसतन केवल 50.4 दिन का ही रोजगार सृजन हो पाया।इस योजना के अंतर्गत ग्रामसभा स्तर पर गांव का विकास प्लान तैयार होगा,जो ब्लॉक और जिला स्तर से होते हुए पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म से जुड़ेगा।वीबी-जी राम जी योजना का बड़ा लाभ यह है कि यह पूरी तरह टैक्नोलॉजी आधारित है,जिसमें बायोमीट्रिक उपस्थिति,डिजिटल मल्टी-लेवल मॉनिटरिंग,6 माह में समीक्षा और समयबद्ध पेमैंट का स्पष्ट प्रावधान किया गया है।उन्होंने आरोप लगाया कि फंडिंग पैटर्न को लेकर कांग्रेस भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है।उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने वर्ष,2006 से 2014 तक मनरेगा पर 2.13 लाख करोड़ रुपए खर्च किए,जबकि एनडीए सरकार ने वर्ष,2014 से 2025 तक 8.53 लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर दिए।रोजगार सृजन के मामले में भी यूपीए सरकार के दौरान 1660 मिलियन मंडेज,जबकि एनडीए सरकार के दौरान 3210 मिलियन मंडेज सृजित हुए।पूर्ण कार्यों की संख्या यूपीए कार्यकाल में 153 लाख,जबकि एनडीए समय अवधि में 862 लाख रही,जो भाजपा सरकार की गंभीरता को दर्शाता है।डाॅ.राजीव बिंदल ने कहा कि वीबी-जी राम जी योजना 4 प्रमुख बिंदुओं ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर,जल संरक्षण,पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका पर केंद्रित है।योजना में प्रशासनिक व्यय को 6 फीसदी से बढ़ाकर 9 फीसदी किया गया है,ताकि इसका बेहतर क्रियान्वयन,ऑडिट और निगरानी हो सके।
