
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं हिमाचल प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के संयुक्त तत्वाधान से उप मंडलीय विधिक सेवा प्राधिकरण ठियोग के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मत्याना में विशाल विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।इस शिविर में नशा मुक्त समाज भारत का संकल्प,पर्यावरण संरक्षण भूमंडल रक्षण और आपदा पीड़ित पुनर्वास विषय पर वक्तव्य रखा गया।एसडीएम ठियोग डॉ शशांक गुप्ता ने कहा कि नशा आज घर-घर की दहलीज पर पहुंच चुका है।एक बार एक मां मेरे कार्यालय आई की उनके बेटे ने उनके साथ मारपीट की और एक एफडी तुड़वा दी।फिर इस पैसे से चिट्टा खरीद कर उसका सेवन बेटे ने कर लिया।पिछले लंबे से समय से वह अपने बेटे के कारण परेशान है और उसे एक अच्छे नशा मुक्ति केंद्र में भेजना चाहती है।युवा बीड़ी,सिगरेट शराब से ही नशे की शुरुआत करते हैं,लेकिन फिर वह सिंथेटिक ड्रग का आदी हो जाते हैं।प्रदेश में सिंथेटिक ड्रग के मामले हर साल बढ़ने लगे हैं।प्रदेश सरकार ने चिट्टा मुक्त हिमाचल संकल्प के साथ एंटी चिट्टा जागरूकता अभियान चलाया है।प्रदेश के कोने-कोने में वाल्कथॉन का आयोजन किया जा रहा है।नशे के तस्करों के खिलाफ सूचना देने वालो को इनाम राशि भी देने की व्यवस्था प्रदेश सरकार ने शुरू की है।

डीएसपी सिद्धार्थ शर्मा ने जानकारी देते हुए कहा ठियोग क्षेत्र में पिछले तीन सालों में 01 किलो 700 ग्राम चिट्टा जब्त किया गया है।इसकी एक डोज 5 से 10 हजार रुपए में मिलती है।आज हर तीसरा युवा नशे का सेवन कर चुका है।उन्होंने कहा कि वह अभी तक 2000 के करीब नशे के आदी युवाओं से मिले हैं और 90 फीसदी से अधिक युवाओं ने कहा कि उन्हें पहली डोज दोस्त के कहने पर ही ली थी।इसके बाद नशे की लत लग गई और पैडलिंग का काम भी शुरू कर दिया।नशे के आदी व्यक्ति को सही तरीके से अस्पताल में अपना उपचार करवाना चाहिए।नशे के खिलाफ सभी को जागरूक नागरिक के तौर पर युवा पीढ़ी और समाज को सुरक्षित रखना होगा।

अधिवक्ता केशव शर्मा ने कहा कि कानून का संरक्षण होना बेहद आवश्यक है।कानून की जानकारी के लिए जागरूक होना महत्वपूर्ण है।हमारा देश कानून के हिसाब से चलता है। उन्होंने कहा कि कानूनी सहायता का लक्ष्य गरीब और कमजोर वर्ग की न्याय तक पहुँच,न्यायालय में बिना खर्च मुकदमे की पैरवी हो सके,समय की बचत और शीघ्र न्याय,कानूनी जागरूकता में वृद्धि हो सके।अधिवक्ता वीरेंद्र कंवर ने पर्यावरण संरक्षण विषय पर कहा कि आज पर्यावरण को संरक्षित करना बेहद जरूरी है।उन्होंने कहा कि शास्त्रों में एक पेड़ दस पुत्रों के बराबर माना जाता है।देश में संतुलित विकास होना चाहिए।अंधाधुंध विकास पर्यावरण के लिए बिलकुल भी सही नहीं है।हम धरती को मां का दर्जा देकर सम्मान करते हैं इसलिए पर्यावरण के संरक्षण का जिम्मा केवल सरकार का ही नहीं बल्कि हर नागरिक का है। प्रदूषण एक गंभीर समस्या है और आज दुनिया के कई देश इस समस्या से जूझ रहे है।हम सभी मिलकर अपने पर्यावरण के संरक्षण के लिए अपनी-अपनी भूमिका निभाए।अधिवक्ता राजेंद्र कश्यप ने पुनर्वास आपदा पीड़ित विषय पर कहा कि आपदा दो प्रकार की होती है एक मानव निर्मित और दूसरी प्राकृतिक आपदा है।मानव निर्मित कारणों से ही अब प्राकृतिक आपदा आना आरंभ हो गई है।इंसान को नियमों के मुताबिक ही भवन निर्माण और अन्य कार्यों को अंजाम देना चाहिए।आपदा के बाद पुनर्वास के लिए सरकारों की भूमिका अग्रणी रहती है।राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तहत पुनर्वास का कार्य राज्य स्तर से जिला स्तर तक किया जाता है।आपदा से बचने और आपदा से निपटने में लोगों का जागरूक होना बेहद आवश्यक है।अधिवक्ता वीरेंद्र डोगरा ने कहा कि देश की युवा पीढ़ी के सामने सबसे बड़ी चुनौती नशा है।नशे के कारण नशे के आदी व्यक्ति का परिवार परेशान हो रहा है।नशे की लत एक बीमारी है और इसका इलाज करवाना चाहिए,इसे छुपाना नहीं चाहिए।इसका सही समय पर इलाज होना जरूरी है।बार एसोसिएशन ठियोग के अध्यक्ष बी एस कश्यप ने शिविर में आए सभी वक्ताओं का स्वागत किया।उन्होंने कहा कि इस तरह के शिविर आमजन के लिए मददगार साबित होते हैं।उन्होंने कहा कि सभ्य समाज के बेहतर संचालन के लिए और विकृतियों को मिटाने के लिए कानून बनाए जाते हैं।

सीनियर सिविल जज ठियोग एवं अध्यक्ष उप मंडलीय विधिक सेवा प्राधिकरण कनिका गुप्ता ने सभी वक्ताओं का विशेष आभार व्यक्त किया।इस मौके पर विभिन्न विभागों की ओर से प्रदर्शनी भी लगाई गई।इस अवसर प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट अपूर्व राज,अधिवक्ता मदन लाल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।आर्थिक कमजोरी,अशिक्षा और जानकारी के अभाव के कारण बहुत से लोग अपने कानूनी अधिकारों का उपयोग नहीं कर पाते हैं।इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए सरकार ने मुफ्त कानूनी सहायता (Free Legal Aid) की व्यवस्था की है,ताकि गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति भी न्याय प्राप्त कर सकें।इस सुविधा के तहत किसी भी पात्र व्यक्ति को बिना शुल्क के वकील,कानूनी सलाह और न्यायालयीन सहायता उपलब्ध कराना शामिल है।यह सुविधा कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम,1987 के अंतर्गत प्रदान की जाती है।इस कानूनी सहायता के लिए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के सदस्य, महिलाएं और बच्चे,दिव्यांग व्यक्ति,गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन यापन करने वाले,आपदा,प्राकृतिक संकट या औद्योगिक दुर्घटना के पीड़ित,हिरासत में बंद व्यक्ति(जेल में बंद,विचाराधीन कैदी) और असंगठित क्षेत्र के मजदूर योग्य माने गए है।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) प्रत्येक जिला में स्थित होता है।यहाँ आवेदन देकर मुफ्त वकील और सलाह प्राप्त की जा सकती है।इसी प्रकार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SLSA) राज्य स्तर पर कार्य करता है और गंभीर मामलों में सहायता प्रदान करता है।राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) पूरे देश में कानूनी सहायता योजनाओं का संचालन करता है।इसके अतिरिक्त,लोक अदालतों में भी मामलों का त्वरित,सुलभ और बिना खर्च निपटारा किया जाता है।कानूनी सहायता हेल्पलाइन एवं विधिक शिविर गाँवों और शहरों में समय-समय पर आयोजित किए जाते हैं।नजदीकी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय जाएँ।एक साधारण आवेदन पत्र भरें और अपनी आर्थिक स्थिति या पात्रता से संबंधित दस्तावेज़ संलग्न करें।जाँच के बाद आपको मुफ्त वकील या कानूनी सलाह प्रदान की जाती है
