शिमला। झारखण्ड विधानसभा की लोक उपक्रम समिति मंगलवार को हिमाचल प्रदेश विधानसभा सचिवालय पहुंची, जहाँ समिति ने विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया के साथ शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात के दौरान अपने-अपने राज्यों के कई महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी सांझा की।
गौरतलब है कि झारखण्ड विधानसभा की लोक उपक्रम समिति सभापति नीरल पूर्ति की अध्यक्षता में गत सायं हिमाचल राज्य के 5 दिनों के अध्ययन प्रवास पर शिमला पहुँची है। समिति में सदस्य राजेश कछप, संजीव सरदार तथा अमित यादव शामिल हैं।
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने समिति सदस्यों को हिमाचली टोपी, शॉल व मफलर पहनाकर उनका अतिथ्य सत्कार किया तथा समिति के साथ बैठक भी की। बैठक के दौरान समिति सदस्यों को अवगत करवाते हुए पठानिया ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा का इतिहास गौरवमयी रहा है। उन्होंने कहा कि इस विधान भवन को कौंसिल चैम्बर के नाम से जाना जाता है तथा यह भवन राष्ट्रीय असैम्बली, पंजाब विधान भवन तथा अन्य कई गतिविधियों का गवाह रहा है। बैठक उपरान्त पठानिया समिति सदस्यों को सदन भी ले गए तथा वहां समिति के साथ कई महत्वपूर्ण जानकारियां सांझा की। समिति सदस्यों को अवगत करवाते हुए पठानिया ने कहा कि कौंसिल चैम्बर का निर्माण 1920 से 1925 के मध्य 10 लाख रुपये व्यय के साथ किया गया था। कौंसिल चैम्बर देश की प्रथम राष्ट्रीय असैम्बली का भवन है।
पठानिया ने कहा कि वर्ष 1925 में स्वराज पार्टी के प्रतिनिधि के रूप में विठ्ठल भाई पटेल ने ब्रिटिश प्रतिनिधि फ्रेडरिक वाईट के साथ चुनाव लड़ा था तथा उन्हें 2 मतों से शिकस्त देकर राष्ट्रीय असैम्बली का प्रथम चेयरमैन बनने का गौरव हासिल किया था। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष के आसन वाली टिक से निर्मित कुर्सी वर्ष 1925 में तत्कालीन बर्मिज सरकार ने बर्तानिया सरकार को उपहार स्वरूप भेंट की थी। पठानिया ने कहा कि कुर्सी ज्यों की त्यों है सिर्फ इसकी कैनोपी को बदला गया है।
पठानिया ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा देश की प्रथम ई-विधान सभा है, जिसका शुभारम्भ 4 अगस्त, 2014 को किया गया था। उन्होंने कहा कि हिमाचल ई-विधान मॉडल का अनुसरण देश के लगभग 22 राज्यों द्वारा किया गया था, लेकिन इसी वर्ष के आरम्भ में डिजिटल इंडिया अभियान के तहत हमने भी अब राष्ट्रीय ई- विधान (एनईवीए) को अपना लिया है।
पठानिया ने कहा कि यह सदन कई महत्वपूर्ण घटनाओं का गवाह रहा है। अंग्रेजो भारत छोड़ो, महिलाओं को मताधिकार का अधिकार, इसी सदन में पारित किए गए थे। उन्होंने कहा कि शिमला कई वर्षों तक देश की ग्रीष्मकालीन राजधानी रही है तथा भारत-पाकिस्तान के बीच विख्यात शिमला समझौता भी 2 जुलाई, 1972 को राज भवन में एक शांति संधि के रूप में हस्ताक्षरित किया गया था।
बैठक के दौरान विधानसभा अध्यक्ष को अवगत करवाते हुए समिति सभापति नीरल पूर्ति ने कहा कि झारखण्ड विधानसभा में सदस्यों की कुल संख्या 81 है तथा हमारे देश का 40 प्रतिशत खनिज झारखण्ड में पाया जाता है, जिनमें सोना, हीरा, यूरेनियम तथा बॉक्साईट जैसी धातुएं शामिल हैं। इसके अतिरिक्त समिति सदस्यों ने विधानसभा अध्यक्ष को झारखण्ड विधानसभा की कार्यप्रणाली, क्रिया-क्लापों, सदन की बैठकों तथा सदस्यों को मिलने वाली सुविधाओं आदि बारे भी जानकारी उपलब्ध करवाई। इस अवसर पर विधानसभा सचिव यशपाल शर्मा भी मौजूद थे।
