हिमाचल में बादल फटने की घटना के बाद जारी रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान अभी तक लापता लोगों का सुराग नहीं मिल पाया है।अब भी 47 लोग लापता हैं।बीते 24 घंटे के दौरान एनडीआरएफ की टीम ने पुलिस और दमकल विभाग के साथ मिलकर सर्च आपरेशन को जारी रखा है।शुक्रवार को मंडी जिला में दो बच्चों के शव बरामद हुए हैं।दोनों बच्चों की उम्र आठ से नौ साल के बीच है और दोनों की पहचान कर ली गई है।हादसे के बाद लापता 47 लोगों में से सबसे बड़ा आंकड़ा शिमला का ही है।यहां शिमला और कुल्लू की सीमा पर समेज में 33 लोग लापता हैं,जबकि कुुल्लू में नौ और मंडी में अब पांच के लापता होने की रिपोर्ट सामने आई है।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को आपदा प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर प्रभावितों से बातचीत की है।इसके अलावा मुख्यमंत्री राहत और बचाव कार्य में जुटे दलों को भी रेस्क्यू आपरेशन की गति तेज करने के आदेश भी दिए हैं।

मुख्यमंत्री के अलावा उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री,शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर,पीडब्ल्यूडी मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने घटनास्थल पर जाकर राहत और बचाव कार्य का जायजा लिया है।मंडी में अब तक पांच लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।इसके अलावा तीनों जिलों में 61 घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं।इनमें कुल्लू में 32,शिमला में 25 और मंडी में चार घर शामिल हैं।जबकि 42 घरों को आंशिक तौर पर नुकसान पहुंचा है।कुल्लू में 37 और शिमला में पांच घरों को नुकसान पहुंचा है।22 गोशाला तेज बहाव की वजह से ध्वस्त हो गई हैं।वहीं, छह वाहन योग्य और 32 पैदल पुल भी हादसे की भेंट चढ़े हैं।तेज बहाव में कुल्लू के छह स्कूल बह गए हैं।इनमें से एक स्कूल शिमला और कुल्लू के सीमावर्ती गांव में सीनियर सेकेंडरी स्कूल समेज भी था,जहां के आठ छात्र लापता हैं।इसके अलावा शिमला में एक स्वास्थ्य संस्थान भी बह गया है।यहां गांव के लोगों को उपचार मिल रहा था।इसके अलावा 17 वाहन हादसे का शिकार हुए हैं,जबकि तीन मछली पालन केंद्र भी बाढ़ की चपेट में आने के बाद बर्बाद हो गए हैं।

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