बोले राम मंदिर पर आस्था नहीं,राजनीतिक स्टंट कर रही कांग्रेस,पहले अपने कथित घोटालों का जवाब दे।

शिमला।भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक कपूर ने राम मंदिर को लेकर कांग्रेस द्वारा किए जा रहे प्रदर्शनों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जिस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर नेशनल हेराल्ड मामले में वर्षों से गंभीर आरोप हैं,उसे भगवान श्रीराम और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर राजनीति करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज राम मंदिर के नाम पर राजनीतिक प्रदर्शन कर रही है,जबकि देश जानता है कि वर्षों तक कांग्रेस ने राम मंदिर निर्माण का विरोध किया।अब जब अयोध्या में भव्य राम मंदिर बन चुका है और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था उससे जुड़ी है,तो कांग्रेस इस विषय पर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रही है।

त्रिलोक कपूर ने कहा कि नेशनल हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने आरोप लगाया है कि ₹90.25 करोड़ के ब्याजमुक्त ऋण के माध्यम से Associated Journals Limited का नियंत्रण Young Indian को हस्तांतरित किया गया,जबकि AJL की संपत्तियों का मूल्य हजारों करोड़ रुपये बताया गया है। ED ने 2023 में ₹751.9 करोड़ मूल्य की संपत्तियां भी अटैच की थीं और 2025 में इस मामले में आरोपपत्र दाखिल किया गया।उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों के अनुसार Young Indian में सोनिया गांधी और राहुल गांधी की संयुक्त हिस्सेदारी 76 प्रतिशत है और मामले की सुनवाई न्यायालय में चल रही है।ऐसे में कांग्रेस को पहले इन गंभीर आरोपों पर जनता के सामने अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए, उसके बाद दूसरों पर उंगली उठानी चाहिए।त्रिलोक कपूर ने कहा कि कांग्रेस का इतिहास बोफोर्स घोटाला,2जी स्पेक्ट्रम घोटाला,कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला,कोयला आवंटन (कोलगेट) मामला,अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदा जैसे अनेक विवादों से जुड़ा रहा है।उन्होंने आरोप लगाया कि जनता के धन से जुड़े मामलों में जवाब देने के बजाय कांग्रेस आज धार्मिक आस्था के विषयों पर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है।उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं हैं,बल्कि करोड़ों भारतीयों की आस्था के केंद्र हैं।भाजपा ने सदैव राम मंदिर को राष्ट्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के रूप में देखा है,जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक मंच बनाने का प्रयास कर रही है।त्रिलोक कपूर ने कहा कि कांग्रेस को धार्मिक भावनाओं का राजनीतिक उपयोग बंद कर जनता के वास्तविक मुद्दों पर बात करनी चाहिए।उन्होंने कहा कि जिस पार्टी पर स्वयं गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हों,वह आस्था और पारदर्शिता पर उपदेश देने की स्थिति में नहीं है।

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